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न बारिश हुई, न नहरों से सिंचाई
ब्यूरो /अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 15 Nov 2015 11:43 PM IST
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एक तो बारिश की कमी, दूसरे सिंचाई नहरों की बदहाली से पर्वतीय क्षेत्रों के खेत-खलिहान बंजर होने की कगार पर दिए हैं। ताड़ीखेत, द्वाराहाट विकासखंड के कई इलाकों में अनाज, सब्जी का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है, लेकिन क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों ने काश्तकारों की उम्मीदों पूरी तरह से पानी फेर दिया है।
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पानी न पहुंचने से हजारों नाली भूमि बंजर होने की कगार पर है। सिलोर, जालली, मासो, च्याली, ताड़ीखेत के टूनाकोट, सेरा, तिपौला आदि क्षेत्रों में कई नहरें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं हैं।
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कृषि पहाड़ की आर्थिकी की रीढ़ समझी जाती है, शासन की तरफ से भी खेती बाड़ी करने के लिए तमाम तरह के प्रचार-प्रसार कार्यक्रम हो रहे हैं, लेकिन कमियों और समस्याओं की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है। ताड़ीखेत के टूनाकोट-तिपौला, बलाड़, सिलोर महादेव में कोठाड़-सेरा, मासों नहर लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी है।
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तमाम कोशिशों के बावजूद इसे ठीक नहीं किया जा रहा है। नहरें तमाम स्थानों पर टूटी हुई हैं। कई बार ग्रामीण अपने स्तर से भी नहरों को ठीक करते हैं, समस्या के कारण यहां एक हजार नाली भूमि बंजर होने की कगार पर है। द्वाराहाट विकास खंड के च्याली ग्रामसभा की छाना नहर भी पिछले सात सालों से क्षतिग्रस्त है।
गगास नदी से इस नहर को 65 साल पहले बनाया गया था। इस नहर से हाट, नौसार, धनखल गांव, छाना, च्याली, भेट गांव के ग्रामीणों की सैकड़ों नाली भूमि सिंचित होती थी, जो वर्तमान में बंजर होने की कगार पर है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रयाग दत्त ने बताया कि आठ किमी लंबी इस नहर में पूर्व में पर्याप्त पानी था, बचपन में वह लोग इस नहर में नहाते भी थे, तब यहां धान की अच्छी खासी पैदावार होती थी।
लेकिन लंबे समय से नहर क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण परेशान हैं। टूनाकोट निवासी प्रगतिशील किसान मदन माहरा का कहना है कि सरकार की तरफ से मांग के अनुरूप बजट नहीं मिल रहा है, यदि मांग के अनुसार धन मिले तो सिंचाई नहरें दुरुस्त रहती।