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छिनीं खुशियां: जिस घर में बच्चों के सपनों की नींव रखी थी, वहीं मलबे ने छीन ली जान; राजेंद्र का घर बना कब्र

Wed, 02 Sep 2026 12:20 PM IST
Heera ललित भट्ट
ललित भट्ट Published by: Heera Updated Wed, 02 Sep 2026 12:20 PM IST
सार

अल्मोड़ा जिले के हवालबाग के वडयूड़ा गांव में सोमवार रात भूस्खलन से गुलाब राम की बहू, पोती और पोते की मौत हो गई। घर के पीछे से आए मलबे ने तीनों को दबा लिया। परिवार का बेटा राजेंद्र राम दिल्ली में रहकर मेहनत कर परिवार का भविष्य संवार रहा था।

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Three died after being buried under debris in almora
वडयूड़ा गांव में भूस्खलन के बाद मलबा घुसने से टूटा मकान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अल्मोड़ा जिले के हवालबाग के वडयूड़ा गांव में सोमवार रात भूस्खलन ने गुलाब राम के परिवार की खुशियां छीन लीं। मकान के पीछे हुए भूस्खलन से मलबा घर में घुसा और इसमें गुलाब राम की बहू, पोती और पोते की दबकर मौत हो गई। हादसे ने उस परिवार के सपनों को भी मलबे में दफन कर दिया जिन्हें पूरा करने के लिए घर का बेटा राजेंद्र राम दिल्ली में रहकर मेहनत कर रहा था।

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वडयूड़ा गांव के गुलाब राम के परिवार की कहानी पहाड़ के उन हजारों परिवारों जैसी है, जो सीमित साधनों में अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना संजोते हैं। परिवार का बेटा राजेंद्र राम रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया था। दिन-रात मेहनत कर जो कुछ कमाया, उससे गांव में परिवार के लिए एक आशियाना बनाया। उसे क्या पता था कि जिस घर को उसने अपनों की सुरक्षित जिंदगी के लिए बनाया है वही एक दिन परिवार के तीन सदस्यों की कब्र बन जाएगा। गांव में राजेंद्र की पत्नी प्रेमा देवी बच्चों की परवरिश और उनके भविष्य को संवारने में जुटी थीं।

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परिवार की जिंदगी भले ही साधारण थी लेकिन सपने बड़े थे। बेटी कल्पना आर्या बीए की पढ़ाई कर रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद कल्पना अपने पैरों पर खड़ी होगी और घर की खुशियों को और बढ़ाएगी। वहीं बेटा मनीष अभी इंटरमीडिएट में पढ़ रहा था। उसकी आंखों में भी भविष्य को लेकर कई सपने थे। माता-पिता बच्चों की पढ़ाई और बेहतर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे लेकिन सोमवार की रात हुई घटना ने परिवार के इन सपनों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। हादसे के बाद राजेंद्र दिल्ली से गांव लौट रहा है लेकिन अब घर में पत्नी और दोनों बच्चों के बजाय उनकी यादें उसका इंतजार कर रही हैं।

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