न रैन बसेरे बने, न ईको हट्स
भनोली तहसील मुख्यालय के निकट स्थित झांकरसैम मंदिर का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना को पहुंचते हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त आवासीय व्यवस्था नहीं होने से उन्हें काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
रैन बसेरा बनाने के लिए दो साल पहले शासन में भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है। डेढ़ करोड़ की लागत से बनने वाले ईको हट्स का काम तीन साल से अधर में है।
सातवीं से 12 वीं सदी में बने जागेश्वर मंदिर समूह से करीब दो किमी पैदल दूरी पर झांकरसैम मंदिर स्थित है। माना जता है कि जागेश्वर मंदिर समूहों की स्थापना के समय ही झांकरसैम मंदिर का भी निर्माण हुआ था। जागेश्वर धाम पहुंचने वाले अधिकांश पर्यटक और श्रद्धालु भी झांकर सैम (भगवान शंकर का स्वरूप) पहुंचते हैं।
इसके अलावा माघ, सावन, बैशाख आदि महीनों में अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ से बड़ी संख्या में देवडांगरों की जातुरा पहुंचती हैं। बांज, बुरांश के घने जंगल के मध्य बने इस मंदिर से हिमालय की चोटियों का मनोहारी दृश्य लोगों को आकर्षित करता है।
मंदिर कमेटी ने स्वयं के प्रयास से कुछ कक्षों का निर्माण किया है, पर श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह नाकाफी है। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने यहां रैन बसेरा बनाने की घोषणा की थी। दो साल पहले आरईएस विभाग ने आंगणन तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन अब तक बजट नहीं मिला।
मंदिर परिसर से लगी भूमि में पांच ईको हट्स बनाने को शासन ने तीन साल पहले करीब डेढ़ करोड़ रुपये अवमुक्त किए थे, लेकिन आज तक काम शुरु नहीं हो सका है।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष देवीदत्त पांडे ने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर रैन बसेरा निर्माण को बजट देने और ईको हट्स का काम जल्द प्रारंभ कराने की मांग की है।
जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्या ने बताया कि कार्यदायी संस्था को ईको हट्स निर्माण करने को कहा गया है। एक सप्ताह के भीतर काम शुरु हो जाएगा।