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धोखाधड़ी के आरोपी हापुड़ के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज
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अल्मोड़ा। अपर सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार पांडे की अदालत ने 14.20 लाख रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के तीसरे आरोपी हापुड़ (उत्तर प्रदेश) के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी रहे राजीव कुमार सक्सेना निवासी भवन संख्या 3/295 विकासनगर अलीगंज थाना विकासनगर सेक्टर तीन लखनऊ उत्तर प्रदेश का जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है। आरोपी धारा 120बी, 409, 420, 467, 468, 471 में जेल में बंद है। इस मामले के दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है।
अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता पूरन सिंह कैड़ा ने न्यायालय में आरोपी राजीव की जमानत का विरोध किया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आरोपी ने मोनार्ड यूनिवर्सिटी के अधिकारी, कर्मचारी के साथ मिलकर विवि में छात्रों के अभिलेख और प्रमाणपत्र प्राप्त कर उनके बैंक में खाते खोल दिए। छात्रों की गैरमौजूदगी में मोनार्ड यूनिवर्सिटी के खाते में 14.20 लाख की राशि हस्तांतरित कर दी। आरोपी ने छात्रों के केवाईसी फॉर्म का भौतिक सत्यापन और डेबिट अथॉरिटी लेटर भी सत्यापित करा दिया और आरोपी ने संस्थान के कार्मिकों के साथ मिलकर कर यह राशि हड़प ली। जिला शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकारी धन को अवैध रूप से प्राप्त में आरोपी की अहम भूमिका रही है। इसलिए आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। कहा गया कि आरोपी पुन: अपराध कर अन्य दस्तावेज और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। न्यायालय ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का परिशीलन कर आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामले में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) शेखर चंद्र नैलवाल, हरीश मनराल ने भी प्रभावी पैरवी की। इस मामले के दो अन्य आरोपियों जैन अब्बास और अनुज गुप्ता के जमानत प्रार्थना पत्र पूर्व में ही खारिज हो चुके हैं।
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अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता पूरन सिंह कैड़ा ने न्यायालय में आरोपी राजीव की जमानत का विरोध किया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आरोपी ने मोनार्ड यूनिवर्सिटी के अधिकारी, कर्मचारी के साथ मिलकर विवि में छात्रों के अभिलेख और प्रमाणपत्र प्राप्त कर उनके बैंक में खाते खोल दिए। छात्रों की गैरमौजूदगी में मोनार्ड यूनिवर्सिटी के खाते में 14.20 लाख की राशि हस्तांतरित कर दी। आरोपी ने छात्रों के केवाईसी फॉर्म का भौतिक सत्यापन और डेबिट अथॉरिटी लेटर भी सत्यापित करा दिया और आरोपी ने संस्थान के कार्मिकों के साथ मिलकर कर यह राशि हड़प ली। जिला शासकीय अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि सरकारी धन को अवैध रूप से प्राप्त में आरोपी की अहम भूमिका रही है। इसलिए आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए। कहा गया कि आरोपी पुन: अपराध कर अन्य दस्तावेज और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। न्यायालय ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का परिशीलन कर आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामले में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) शेखर चंद्र नैलवाल, हरीश मनराल ने भी प्रभावी पैरवी की। इस मामले के दो अन्य आरोपियों जैन अब्बास और अनुज गुप्ता के जमानत प्रार्थना पत्र पूर्व में ही खारिज हो चुके हैं।
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