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तंत्र ने जब नहीं सुनीं तो ग्रामीणों ने गैंती फावड़े उठा बना डाली दो मीटर चौड़ी बटिया
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। कोरोनाकाल में गांव लौटे प्रवासियों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव तक दो मीटर चौड़ा रास्ता बना दिया। अब बरसात के बाद दोबारा काम शुरू करने की योजना है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी बदया, सेल्टाना, पस्तोड़ा आदि गांव मोटर मार्ग से नहीं जुड़ सके। जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त बड़े बड़े वायदे कर जाते हैं लेकिन जीतने के बाद सुध नहीं ली जाती। हर विकास कार्य के लिए राजनीतिक श्रेय की बात पहले आ जाती है। यह गांव मोटर मार्ग से पांच कमी दूर हैं। युवा दिनेश बुधोड़ी ने बताया कि पैदल रास्ता इतना उबड़-खाबड़ है कि पालतू जानवर तक नहीं चल पाते। सड़क न होने के कारण कई गंभीर रोगी दम तोड़ चुके हैं। ग्रामीणों ने कहा जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों का दर्द नहीं समझा। कोरोनाकाल में घर लौटे प्रवासियों ने श्रमदान कर दो किमी लंबे रास्ते का निर्माण कर दिया है। इसमें ग्रामीण बुजुर्गों और महिलाओं ने भी सहयोग किया। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. प्रमोद नैनवाल और भाजपा नेता कैलाश पंत ने भी युवाओं का हौसला बढ़ाया।
इन प्रवासियों ने किया सहयोग
दीपक बुधोड़ी, संतोष बुधोड़ी, शिव दत्त बुधोड़ी, नरेंद्र सिंह बिष्ट, चंद्रशेखर बुधोड़ी, दिनेश बुधोड़ी, मोहित बुधोड़ी, प्रदीप बुधाड़ी, प्रकाश सिंह बिष्ट, नवीन चंद्र, रॉकी आर्या, कमलेश आर्या, जगदीश बुधोड़ी, उमेश बुधोड़ी, पकज, सुमित, भारत, गणेश, भुवन, भैरव दत्त, चंद्रशेखर, मनोज, प्रकाश, गौरव, आकाश बुधोड़ी आदि।
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ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी बदया, सेल्टाना, पस्तोड़ा आदि गांव मोटर मार्ग से नहीं जुड़ सके। जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त बड़े बड़े वायदे कर जाते हैं लेकिन जीतने के बाद सुध नहीं ली जाती। हर विकास कार्य के लिए राजनीतिक श्रेय की बात पहले आ जाती है। यह गांव मोटर मार्ग से पांच कमी दूर हैं। युवा दिनेश बुधोड़ी ने बताया कि पैदल रास्ता इतना उबड़-खाबड़ है कि पालतू जानवर तक नहीं चल पाते। सड़क न होने के कारण कई गंभीर रोगी दम तोड़ चुके हैं। ग्रामीणों ने कहा जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों का दर्द नहीं समझा। कोरोनाकाल में घर लौटे प्रवासियों ने श्रमदान कर दो किमी लंबे रास्ते का निर्माण कर दिया है। इसमें ग्रामीण बुजुर्गों और महिलाओं ने भी सहयोग किया। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. प्रमोद नैनवाल और भाजपा नेता कैलाश पंत ने भी युवाओं का हौसला बढ़ाया।
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इन प्रवासियों ने किया सहयोग
दीपक बुधोड़ी, संतोष बुधोड़ी, शिव दत्त बुधोड़ी, नरेंद्र सिंह बिष्ट, चंद्रशेखर बुधोड़ी, दिनेश बुधोड़ी, मोहित बुधोड़ी, प्रदीप बुधाड़ी, प्रकाश सिंह बिष्ट, नवीन चंद्र, रॉकी आर्या, कमलेश आर्या, जगदीश बुधोड़ी, उमेश बुधोड़ी, पकज, सुमित, भारत, गणेश, भुवन, भैरव दत्त, चंद्रशेखर, मनोज, प्रकाश, गौरव, आकाश बुधोड़ी आदि।
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