चौखुटिया (अल्मोड़ा)। परंपरागत चांचरी, भगनौल व होली गायन करने वाले होल्यारों की जुबां पर गैरसैंण राजधानी का रंग छाया है। होल्यार अपने गायन के माध्यम से गैरसैंण राजधानी बनने से चहुमुखी विकास व समस्याओं के निदान की उम्मीद कर रहे हैं। इसी ओर इंगित उनके गीतों की धूम मची है। पांडुवाखाला काखा चौखुटिया बाजारा, गैरसैंण राजधानी हैगेछ अब हौल विचारा, अल्मोड़ा, रानीखेता तल काखा गगासा, गैरसैंण राजधानी आपुणी अब हौल विकासा। इसी क्रम में ग्रीष्मकालीन बनगे राजधानी, त्रिवदें ज्यू तुमरी जयजयकारा हो, अब स्थाई बनै दियो तुमरी जयजयकारा हो। इसी क्रम में बढ़ती महंगाई की ओर इशारा करते हुए -हरिया साड़ी लाल बिलौजा, चऊनी कसा बूंट, सौ रूपैं क नोट म्यर चाहा पांणी में टूट, सहित ज्वलंत मुद्दों से जुड़े गीत खूब रंग जमा रहे हैं। होली गायन में मुख्य रूप से खजुरानी के युवा होल्यार जसोद सिंह ग्वाली के भवानी राम, प्रेमराम व तिलराम की टोली शामिल रही। इस दौरान बुजुर्ग होल्यार अपने जोश से ठंड मौसम में भी गर्मी सो जोश जगा गए।