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Almora News: सल्ट के देवालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन घंटे बाद नवजात की मौत
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। सल्ट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवालय में नवजात की मौत का मामला सामने आया है। जन्म के महज तीन घंटे के भीतर नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने मामले में डॉक्टर पर मौके पर नहीं आने का आरोप लगाते हुए डीएम को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
पर्वतीय क्षेत्रों में लचर स्वास्थ्य सुविधाएं गंभीर मामलों में मरीजों पर भारी पड़ रही हैं। ऐसा ही मामला सीएचसी देवालय में सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 31 जनवरी की सुबह सात बजे खदेरागांव की गर्भवती चंपा देवी पत्नी आलम सिंह प्रसव पीड़ा से जूझते हुए गांव की आशा वर्कर के साथ अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल पहुंचने पर वहां तैनात नर्स ने आशा वर्कर से जल्द डॉक्टर को बुलाने को कहा लेकिन डॉक्टर के पहुंचने से पहले ही गर्भवती का सुरक्षित प्रसव हो गया। आरोप है कि प्रसव के बाद भी जच्चा-बच्चा को देखने के लिए कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा। करीब तीन घंटे बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। पति आलम सिंह ने घटना को लेकर डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि उनके नवजात की मौत विभाग की लापरवाही से हुई है। उन्होंने डीएम, एसडीएम, सीएमओ को पत्र भेजकर डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कहा ऐसे लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
एक माह पूर्व भी दो नवजातों की हुई थी मौत
अल्मोड़ा। एक माह पूर्व महिला अस्पताल में भी दो नवजातों की मौत हुई थी। तब विभाग ने दोनों मामलों में जांच के आदेश दिए थे लेकिन अब तक दोनों की मौत होने के सही तथ्य सामने नहीं आ सके हैं। अब सल्ट में हुई घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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मैंने अपने स्तर से जांच कर ली है। स्टाफ नर्स वहीं मौजूद थीं। प्रसव के पांच मिनट बाद महिला चिकित्सक भी मौके पर पहुंच गई थी जो सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा है। करीब तीन घंटे तक नवजात स्वस्थ था। मां का दूध पीने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। इसमें डॉक्टर की लापरवाही सामने नहीं आ रही है। नवजात के फेफड़ों में गंदगी घुसने के कारण मौत होने की आशंका है।
डॉ. सौरभ सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी देवालय, सल्ट
नवजात की मौत गंभीर मामला है। जिले में लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं जो चिंता का विषय है। मामले की जांच होगी जिसके लिए डीएम को निर्देशित किया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
ज्योति साह मिश्रा, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग
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पर्वतीय क्षेत्रों में लचर स्वास्थ्य सुविधाएं गंभीर मामलों में मरीजों पर भारी पड़ रही हैं। ऐसा ही मामला सीएचसी देवालय में सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 31 जनवरी की सुबह सात बजे खदेरागांव की गर्भवती चंपा देवी पत्नी आलम सिंह प्रसव पीड़ा से जूझते हुए गांव की आशा वर्कर के साथ अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल पहुंचने पर वहां तैनात नर्स ने आशा वर्कर से जल्द डॉक्टर को बुलाने को कहा लेकिन डॉक्टर के पहुंचने से पहले ही गर्भवती का सुरक्षित प्रसव हो गया। आरोप है कि प्रसव के बाद भी जच्चा-बच्चा को देखने के लिए कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा। करीब तीन घंटे बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। पति आलम सिंह ने घटना को लेकर डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि उनके नवजात की मौत विभाग की लापरवाही से हुई है। उन्होंने डीएम, एसडीएम, सीएमओ को पत्र भेजकर डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कहा ऐसे लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
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एक माह पूर्व भी दो नवजातों की हुई थी मौत
अल्मोड़ा। एक माह पूर्व महिला अस्पताल में भी दो नवजातों की मौत हुई थी। तब विभाग ने दोनों मामलों में जांच के आदेश दिए थे लेकिन अब तक दोनों की मौत होने के सही तथ्य सामने नहीं आ सके हैं। अब सल्ट में हुई घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
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मैंने अपने स्तर से जांच कर ली है। स्टाफ नर्स वहीं मौजूद थीं। प्रसव के पांच मिनट बाद महिला चिकित्सक भी मौके पर पहुंच गई थी जो सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा है। करीब तीन घंटे तक नवजात स्वस्थ था। मां का दूध पीने के कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। इसमें डॉक्टर की लापरवाही सामने नहीं आ रही है। नवजात के फेफड़ों में गंदगी घुसने के कारण मौत होने की आशंका है।
डॉ. सौरभ सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी देवालय, सल्ट
नवजात की मौत गंभीर मामला है। जिले में लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं जो चिंता का विषय है। मामले की जांच होगी जिसके लिए डीएम को निर्देशित किया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
ज्योति साह मिश्रा, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग