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साधना स्थलों को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की जरूरत: राज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Mon, 16 Jul 2018 12:05 AM IST
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काकड़ीघाट में आयोजित कार्यक्रम में एक बालिका को पुरस्कृत करते राज्यपाल डा. केके पॉल।
- फोटो : अमर उजाला
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राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने स्वामी विवेकानंद के साधना स्थलों को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने पर जोर दिया ताकि स्वामी विवेकानंद ने भारत भ्रमण के दौरान जिले के जिन स्थानों में रहकर ज्ञान प्राप्त किया उनका व्यापक प्रचार प्रसार हो सके। काकड़ीघाट में स्वामी विवेकानंद ज्ञान वृक्ष शिक्षावृत्ति और काकड़ीघाट प्रकल्प कार्यक्रम में पहुंचे राज्यपाल ने जीआईसी नौगांव में पुस्तकालय की स्थापना के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। कहा कि पुस्तकालय की स्थापना होने से बच्चों को स्वामी विवेकानंद समेत अन्य महापुरुषों के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
इस मौके पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा के उन्नयन के लिए मातृभाषा को बढ़ावा देने के साथ संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान रखने को कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि संस्कृत शिक्षा से जहां एक ओर हमें वेद पुराणों का ज्ञान होगा वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा के ज्ञान से विदेशों में हो रहे तकनीकी विकास के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
उन्होंने रामकृष्ण कुटीर एवं विवेकानंद सेवा समिति काकड़ीघाट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विवेकानंद ज्ञान वृक्ष शिक्षावृत्ति और काकड़ीघाट प्रकल्प श्रंखला परिसर में आंवले का पौधा भी रोपा। इस अवसर पर राज्यपाल ने स्थानीय 13 प्राथमिक विद्यालयों एवं दो इंटर कालेजों के छात्र-छात्राओं को स्कूल बैग एवं अन्य पाठ्य सामग्री भी वितरित की। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्या ने कहा कि कंडारखुआ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रदेश सरकार कृत संकल्प है। उन्होंने शिक्षा गुणात्मक सुधार लाने और क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होने की अपील भी की। कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद सेवा समिति के अध्यक्ष हरीश परिहार ने क्षेत्र की समस्याओं की ओर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया। रामकृष्ण कुटीर के स्वामी सोमदेवानंद ने राज्यपाल का आभार जताया। ग्राम प्रधान नौगांव इंदिरा देवी ने उन्हें अभिनंदन पत्र भी भेंट किया।
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कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, कवि देवकी नंदन कांडपाल, विवेकानंद सेवा समिति से जुड़े स्वामी शान्ति कुमार घोष, ज्योति राणा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख धन सिंह रावत, सुंदर सिंह, मोहन सिंह, एसएसपी पी रेणुका देवी, संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत हिमाशुं खुराना, एसडीएम विवेक राय के अलावा पुलिस, शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्थानीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य मौजूद रहे। संचालन विशन सिंह कनवाल ने किया।
काकड़ीघाट के पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था स्वामी विवेकानंद को
अल्मोड़ा। 1890 की हिमालय भ्रमण के दौरान जब स्वामी विवेकानंद नैनीताल से अल्मोड़ा के लिए पैदल यात्रा पर चले थे तब काकड़ीघाट में इसी स्थान पर पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह प्राचीन पीपल का पेड़ कुछ साल पहले सूख गया लेकिन इसके पूरी तरह सूखने से पूर्व ही वैज्ञानिकों ने इसका क्लोन तैयार कर लिया था। क्लोन से विकसित नए पौधे का रोपण 2016 में इसी स्थान पर किया गया। यह पौधा अब काफी बड़ा हो चुका है। आज राज्यपाल केके पॉल और अन्य अतिथियों ने इस पौधे को पानी से सींचा।
बच्चों को मातृ भाषा में दें शिक्षा पर अंग्रेजी भी जरूरी
अल्मोड़ा। अपने संबोधन में राज्यपाल केके पॉल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद इस बात पर जोर देते थे कि बच्चों को शिक्षा मातृ भाषा में दी जानी चाहिए और उन्हें संस्कृत की भी जानकारी होनी चाहिए। साथ ही अंग्रेजी का ज्ञान भी होना जरूरी है। राज्यपाल ने कहा स्वामी जी की यह बातें आज के दौर में भी काफी प्रासंगिक हैं।
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इस मौके पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा के उन्नयन के लिए मातृभाषा को बढ़ावा देने के साथ संस्कृत और अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान रखने को कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि संस्कृत शिक्षा से जहां एक ओर हमें वेद पुराणों का ज्ञान होगा वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा के ज्ञान से विदेशों में हो रहे तकनीकी विकास के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
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उन्होंने रामकृष्ण कुटीर एवं विवेकानंद सेवा समिति काकड़ीघाट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विवेकानंद ज्ञान वृक्ष शिक्षावृत्ति और काकड़ीघाट प्रकल्प श्रंखला परिसर में आंवले का पौधा भी रोपा। इस अवसर पर राज्यपाल ने स्थानीय 13 प्राथमिक विद्यालयों एवं दो इंटर कालेजों के छात्र-छात्राओं को स्कूल बैग एवं अन्य पाठ्य सामग्री भी वितरित की। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्या ने कहा कि कंडारखुआ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रदेश सरकार कृत संकल्प है। उन्होंने शिक्षा गुणात्मक सुधार लाने और क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होने की अपील भी की। कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद सेवा समिति के अध्यक्ष हरीश परिहार ने क्षेत्र की समस्याओं की ओर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित किया। रामकृष्ण कुटीर के स्वामी सोमदेवानंद ने राज्यपाल का आभार जताया। ग्राम प्रधान नौगांव इंदिरा देवी ने उन्हें अभिनंदन पत्र भी भेंट किया।
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कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, कवि देवकी नंदन कांडपाल, विवेकानंद सेवा समिति से जुड़े स्वामी शान्ति कुमार घोष, ज्योति राणा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख धन सिंह रावत, सुंदर सिंह, मोहन सिंह, एसएसपी पी रेणुका देवी, संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत हिमाशुं खुराना, एसडीएम विवेक राय के अलावा पुलिस, शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्थानीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य मौजूद रहे। संचालन विशन सिंह कनवाल ने किया।
काकड़ीघाट के पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था स्वामी विवेकानंद को
अल्मोड़ा। 1890 की हिमालय भ्रमण के दौरान जब स्वामी विवेकानंद नैनीताल से अल्मोड़ा के लिए पैदल यात्रा पर चले थे तब काकड़ीघाट में इसी स्थान पर पीपल के पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह प्राचीन पीपल का पेड़ कुछ साल पहले सूख गया लेकिन इसके पूरी तरह सूखने से पूर्व ही वैज्ञानिकों ने इसका क्लोन तैयार कर लिया था। क्लोन से विकसित नए पौधे का रोपण 2016 में इसी स्थान पर किया गया। यह पौधा अब काफी बड़ा हो चुका है। आज राज्यपाल केके पॉल और अन्य अतिथियों ने इस पौधे को पानी से सींचा।
बच्चों को मातृ भाषा में दें शिक्षा पर अंग्रेजी भी जरूरी
अल्मोड़ा। अपने संबोधन में राज्यपाल केके पॉल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद इस बात पर जोर देते थे कि बच्चों को शिक्षा मातृ भाषा में दी जानी चाहिए और उन्हें संस्कृत की भी जानकारी होनी चाहिए। साथ ही अंग्रेजी का ज्ञान भी होना जरूरी है। राज्यपाल ने कहा स्वामी जी की यह बातें आज के दौर में भी काफी प्रासंगिक हैं।