कुमाऊंनी भाषा को रोजगार से जोड़ने की जरूरत
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कुंदन लाल साह प्रेक्षागृह में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हो गया है। वक्ताओं ने कुमाऊंनी को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर कई साहित्यकारों और रचनाकारों को भी पुरस्कृत किया गया। अपने व्याख्यान में साहित्यकार डॉ. दिवा भट्ट ने कहा कि कुमाऊंनी भाषा वर्तमान में सोशल मीडिया के माध्यम से भी तेजी से प्रसारित हो रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी कुमाऊंनी भाषा से संबंधित प्रश्न पूछे जाने लगे हैं, जो अच्छी पहल है। हालांकि कुमाऊंनी में साहित्य की सभी विधाओं में काम होना बाकी है।
कुमाऊंनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति एवं पहरू कुमाऊंनी मासिक पत्रिका के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कुमाऊंनी का मानक रूप खसपर्जिया (बोली) है। लेकिन, लिखने के दौरान भी इसका मानक रूप एक ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से लोग कुमाऊंनी भाषा को जीवित रखने का काम कर रहे हैं। इसे भाषा का दर्जा मिले, इसके लिए सरकार को कदम उठाने होंगे। कुमाऊंनी भाषा विभाग के संयोजक प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने बताया कि कुमाऊं विवि में अगले वर्ष से एमए में कुमाऊंनी भाषा की पढ़ाई कराई जाएगी। अध्यक्षीय भाषण में डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि कुमाऊंनी को रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। इससे पूर्व पहरू के संपादक डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि यूनस्को ने विश्व की मरणासन्न भाषाओं में कुमाऊंनी को भी शामिल किया है, जो कि चिंताजनक है। प्रो. बीडीएस नेगी ने कुमाऊंनी के प्राचीन स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कुमाऊंनी का प्रथम अभिलेख 1099 ई में मिलता है।
इस मौके पर पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, अरबन बैंक अध्यक्ष आनंद बगडवाल, प्रो. शेर सिंह बिष्ट, डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट आदि अतिथियों ने कुमाऊंनी लेखक और साहित्यकार पूरन चंद्र कांडपाल की छिलुक उपन्यास, भैरव दत्त पांडे की माटिक मोह कहानी संग्रह और लोकगायक प्रह्लाद मेहरा की पुस्तक म्यर सदाबहार लोकगीत का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में गिरीश चंद्र बिष्ट, सीएल वर्मा, उदय किरौला, जुगल किशोर पेटशाली, ब्रिगेडियर धीरज जोशी, दयानंद कठैत, पीसी तिवारी, ज्ञान पंत, दामोदर जोशी, पवनेश ठकुराठी, जमन बिष्ट, रमेश हितैषी, विनोद पंत, श्याम सिंह कुटौला, सुशील कुमार, गिरीश चंद्र, ओम प्रकाश सिंह, प्रकाश जोशी, रतन सिंह किरमोलिया आदि साहित्यकार मौजूद थे। इस मौके पर पूरन बोरा एंड पार्टी ने सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी।
पहले दिन कई साहित्यकारों को मिला सम्मान
राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन के पहले दिन डॉ. चंद्रशेखर तिवारी, डॉ. शिवचरण पांडे को पुष्पलता जोशी कुमाऊंनी भाषा सेवी सम्मान दिया गया। इसके अलावा डॉ. रमेश चंद्र पांडे राजन, ललित सिंह सिराड़ी व राजाराम विद्यार्थी को बहादुर सिंह बनौला कुमाऊंनी साहित्य सेवी सम्मान और प्रह्लाद मेहरा एवं नारायण सिंह थापा को वैद्य कल्याण सिंह बिष्ट स्मृति कुमाऊंनी संस्कृति सेवी सम्मान दिया गया।