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कसारदेवी में उपेक्षित 1400 साल पुराना दुर्लभ शिलालेख

Wed, 20 May 2015 11:46 PM IST
दीप जोशी/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
दीप जोशी/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Wed, 20 May 2015 11:46 PM IST
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Ksardevi neglected 1,400 years old rare inscription

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अल्मोड़ा के पास कसारदेवी में एक शिला में 1400 साल पुराना दुर्लभ लेख अंकित है, लेकिन संरक्षण के अभाव में यह ऐतिहासिक विरासत नष्ट होने के कगार पर है। शिलालेख में ब्राह्मी लिपि में कुछ शब्द अंकित हैं। भाषा की जटिलता के कारण लंबे समय तक इसका अनुवाद नहीं हो सका था।

कसारदेवी मंदिर के पास स्थित इस शिला पर छठी शताब्दी का एक लेख उकेरा गया। यह शिलालेख ब्राह्मी लिपि में है। 50 के दशक में सबसे पहले डा. दिनेश चंद्र सरकार ने ऐपिग्राफिया इंडिया में इसका अनुवाद प्रकाशित किया था। इसका संस्कृत अनुवाद है- रुद्रेश्वर: प्रतिष्ठापित: वेतला पुत्रा रुद्रकेण। इसका मतलब है- वेतला के पुत्र रुद्र ने यहां महादेव को स्थापित किया। इस शिलालेख से इस अवधारणा को बल मिलता है कि छठी शताब्दी से पहले भी इस क्षेत्र में महादेव के मंदिरों को स्थापित करने की परंपरा थी। शिला तीन तरफ से टूट गई है।

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शिला में आई दरारों में घास भी उग आई है। इसको संरक्षित कर पर्यटकों के लिए प्रदर्शित किया जा सकता है, लेकिन आज तक प्रदेश अथवा केंद्र सरकार की किसी एजेंसी ने इसे संरक्षण में नहीं लिया। पुराविद् कौशल सक्सेना ने संरक्षण के लिए कई बार प्रदेश सरकार को लिखा भी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
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पुरातत्व विभाग ने इस दुर्लभ शिलालेख को संरक्षित करने का निर्णय ले लिया है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शीघ्र ही इसकी अधिसूचना होगी।
- डा. चंद्र सिंह चौहान, अन्वेषण सहायक

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