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ग्रामीण क्षेत्रों में भी करेंसी की समस्या गहराई
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:19 PM IST
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धौलछीना के एक बैंक में जमा भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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बड़ी करेंसी बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी छोटे करेंसी की समस्या गहरा गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इक्का-दुक्का स्थानों पर ही बैंक हैं। इससे इन बैंकों पर लोगों का दबाव बढ़ गया है। एसबीआई धौलछीना शाखा में सुबह से ही करेंसी लेने और नोट बदलने के लिए लोगों की भीड़ लग रही है। दोपहर तक कैश खत्म होने से लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है।
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एसबीआई धौलछीना शाखा में सुबह से ही ग्राहकों की कतार लग रही है। लोगों के बैठने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। शाखा में सात दिन में डेढ़ करोड़ रुपए जमा हुए हैं और पांच सौ-एक हजार के 82 लाख रुपए लोगों ने बदले हैं। शाखा प्रबंधक प्रशांत शर्मा ने बताया कि बैंक में कैशियर के तीन पदों में से ही एक ही कैशियर तैनात है। इसके बावजूद प्रतिदिन चार सौ उपभोक्ताओं के लेनदेन का कार्य निपटाया जा रहा है। बैंक की प्रतिदिन की लिमिट दस लाख रुपए है। कम स्टाफ होने के बाजूद बैंक कर्मी लोगों को सहयोग कर रहे हैं।
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जूनियर हाईस्कूल खांकरी के शिक्षक नंदन सिंह कार्की के तीन बच्चे बाहर पढ़ते हैं। उन्हें उनकी फीस जमा करवानी है। उन्होंने बताया कि वह छुट्टी लेकर बैंक में पैसे लेने आ रहे हैं। थोक व्यापारी मोहन सिंह जीना का कहना है कि राशन आदि सामग्री के लिए लोगों के पास पैसा नहीं है। लोगों को उधार सामान देना पड़ रहा है। कई लोग दो हजार रुपए का नोट लेकर आ रहे हैं। खुले पैसे नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं।
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ज्वेलर्स प्रकाश वर्मा का कहना है कि विवाह का सीजन है आभूषण बनाने के आर्डर लिए हैं। पैसा बैंक में जमा है, लेकिन पैसा नहीं निकल रहा है। इस कारण सोना नहीं खरीद पाने के कारण लोगों की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। डाक्टर एके मजूमदार का कहना है कि लोगों के पास दवा के लिए खुले पैसे नहीं हैं। ऐसे लोगों को उधार में दवा दे रहे हैं। सस्ता गल्ला विक्रेता कै. पूरन सिंह सुप्याल का कहना है कि पैसा नहीं होने से चालान नहीं लगा पा रहा हैं।