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Almora News: इकोनॉमी के बजाय इकोलॉजी संतुलित होने से ही समृद्ध होगी मानव सभ्यता
Wed, 01 Apr 2026 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 01 Apr 2026 11:28 PM IST
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अल्मोड़ा। ग्रीन हिल्स ट्रस्ट की ओर से बुधवार को नगर के एक होटल में वारि विमर्श जल पर चर्चा श्रृंखला का चतुर्थ संस्करण आयोजित हुआ। वनाग्नि और जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण विषय पर बोलते हुए मुख्य वक्ता स्याही देवी विकास मंच के संस्थापक संयोजक गजेंद्र पाठक ने कहा कि इकोनॉमी के बजाय इकोलॉजी संतुलित होने से ही मानव सभ्यता समृद्ध होगी। जंगल ही क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग रोक सकते हैं।
विकास की अंधी दौड़ के चलते वैश्विक स्तर पर बढ़ता कार्बन फुटप्रिंट पर्यावरण के साथ ही प्राणी मात्र के जीवन अस्तित्व पर खतरा है। उन्होंने कहा 80 के दशक के बाद वैश्विक स्तर पर इकोलॉजी के बजाय इकोनॉमी पर ज्यादा जोर दिया गया। प्राणियों के जीवन के मूल तत्व पानी, हवा, जंगल, जैव विविधता सरकारों की नीतियों में शामिल नहीं हुए। अवैज्ञानिक विकास की दौड़ में तेजी से बढ़ रहा कार्बन फुटप्रिंट मानव सभ्यता के लिए खतरा बनता जा रहा है।
मौसम चक्र में परिवर्तन के कारण जहां हिमालयी क्षेत्र में स्नो लाइन पीछे हट रही है, ग्लेशियरों का अस्तित्व संकट में है, वहीं खाद्यान्न पैदावार प्रभावित हो रही है। वायु और जल प्रदूषण से बीमारियां जानलेवा हो रही हैं। कार्बन फुटप्रिंट काम करने को अब भी समाज ने समग्र रूप से जंगलों को बचाने के लिए प्राथमिकता से काम नहीं किया तो भविष्य में भयावह दुष्परिणाम आने तय हैं। डीएफओ प्रदीप धौलाखंडी ने वनाग्नि और उसका कारण, वन्य जीव मानव संघर्ष, मौसम चक्र में लगातार हो रहे परिवर्तन पर शोध और आंकड़ों के जरिए जानकारी दी।
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संचालन करते हुए संस्था सचिव डॉ. वसुधा पंत ने कहा पानी की कमी, वनाग्नि की बढ़ती घटनाएं, प्रदूषण आदि मनुष्य निर्मित आपदा है और मनुष्य ही इसका समाधान कर सकता है। कार्यक्रम में मेयर अजय वर्मा, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा, डॉ. नीरज आदि मौजूद रहे।
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विकास की अंधी दौड़ के चलते वैश्विक स्तर पर बढ़ता कार्बन फुटप्रिंट पर्यावरण के साथ ही प्राणी मात्र के जीवन अस्तित्व पर खतरा है। उन्होंने कहा 80 के दशक के बाद वैश्विक स्तर पर इकोलॉजी के बजाय इकोनॉमी पर ज्यादा जोर दिया गया। प्राणियों के जीवन के मूल तत्व पानी, हवा, जंगल, जैव विविधता सरकारों की नीतियों में शामिल नहीं हुए। अवैज्ञानिक विकास की दौड़ में तेजी से बढ़ रहा कार्बन फुटप्रिंट मानव सभ्यता के लिए खतरा बनता जा रहा है।
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मौसम चक्र में परिवर्तन के कारण जहां हिमालयी क्षेत्र में स्नो लाइन पीछे हट रही है, ग्लेशियरों का अस्तित्व संकट में है, वहीं खाद्यान्न पैदावार प्रभावित हो रही है। वायु और जल प्रदूषण से बीमारियां जानलेवा हो रही हैं। कार्बन फुटप्रिंट काम करने को अब भी समाज ने समग्र रूप से जंगलों को बचाने के लिए प्राथमिकता से काम नहीं किया तो भविष्य में भयावह दुष्परिणाम आने तय हैं। डीएफओ प्रदीप धौलाखंडी ने वनाग्नि और उसका कारण, वन्य जीव मानव संघर्ष, मौसम चक्र में लगातार हो रहे परिवर्तन पर शोध और आंकड़ों के जरिए जानकारी दी।
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संचालन करते हुए संस्था सचिव डॉ. वसुधा पंत ने कहा पानी की कमी, वनाग्नि की बढ़ती घटनाएं, प्रदूषण आदि मनुष्य निर्मित आपदा है और मनुष्य ही इसका समाधान कर सकता है। कार्यक्रम में मेयर अजय वर्मा, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा, डॉ. नीरज आदि मौजूद रहे।