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गुरुड़ाबांज महाविद्यालय में हिंदी, संस्कृत पढ़ाने वाला कोई नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा।
Updated Tue, 25 Aug 2015 12:58 AM IST
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राज्य बनने के बाद सरकार ने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने को पर्वतीय क्षेत्रों में कई स्थानों पर महाविद्यालयों की स्थापना की।
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लंबे समय बाद भी इन डिग्री कालेजों में संसाधनों का अभाव बना हुआ है। विज्ञान वर्ग और रोजगारपरक विषय शुरू नहीं होने से यह डिग्री कालेज औचित्यहीन साबित हो रहे हैं।
शासन ने 2006 में भनोली तहसील के गुरुड़ाबांज में कामर्स विषय के साथ डिग्री कालेज को मंजूरी दी। स्थानीय व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराए गए भवन में कक्षाएं संचालित हुईं।
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जनदबाव में सरकार ने 2010 में यहां स्नातक स्तर पर कला विषय को वित्तहीन मान्यता दी। 2014 में हिंदी, संस्कृत, राजनीतिक शास्त्र, सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, शिक्षा शास्त्र विषयों को वित्तीय मंजूरी मिली।
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हिंदी और संस्कृत विषयों में अब तक शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं हुई है। कामर्स में भी स्वीकृत दो पदों में से एक पद रिक्त है। दो करोड़ से अधिक लागत से भवन बन जाने के बाद 25 मार्च से कक्षाएं नए भवन में संचालित होने लगी हैं।
चालू सत्र में अब तक यहां छात्र-छात्राओं की संख्या करीब तीन सौ पहुंच गई है। शिक्षकों और प्राचार्य के अलावा दो लिपिक और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं।
मुख्य सड़क से कालेज को जोड़ने के लिए कच्ची सड़क की हालत खस्ता है। विज्ञान वर्ग नहीं होने से छात्र-छात्राओं को पढ़ाई को अन्यत्र जाना पड़ रहा है।
रोजगारपरक विषय नहीं होने से भी अधिकांश विद्यार्थी मैदानी क्षेत्रों में जाकर पढ़ाई करने को विवश हैं। प्राचार्य राधे श्याम भट्ट ने बताया कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत कालेज के लिए 1.98 करोड़ रुपये मंजूर हो गए हैं। इस धनराशि का उपयोग भवन निर्माण आदि कार्यों में होगा।