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मरचूला कौतिक इंटरनेशनल फिल्म फ़ेस्टिवल
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कौतिक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिबल में चर्चा करते फिल्म निर्माता और निर्देशक
- फोटो : ALMORA
मौलेखाल (अल्मोड़ा)। दो दिवसीय कौतिक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल-2020 का समापन हो गया है। फेस्टिवल के दूसरे दिन 22 फिल्में दिखाई गईं, जिनमें होम रेडेथोमस मेडिक जैन, डिरिफ्ट नाका जोन, रेजरेटस तमारा मजकी, विफोर डारक नैस मौसाइब, द रोड आदि शामिल हैं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से क्षेत्र में फिल्म निर्माण के अवसर खुलेंगे।
विभिन्न क्षेत्रों से आए फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों ने कहा कि कौतिक के जरिये फिल्म निर्माण में कॅरिअर बनाने वालों के लिए अच्छा मौका है। अन्य प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की खूबसूरती को सराहा और कहा कि यहां फिल्म निर्माण की अच्छी संभावना है। इससे क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। कहा कि इस बार कोविड के चलते फिल्में तो देश-विदेश से आई हैं, परंतु फिल्में बनाने में काफी दिक्कतें हुईं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड फिल्म निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान है। फेस्टिवल में उत्तराखंड के अलावा देश के विभिन्न प्रदेशों, ईरान, फ्रांस आदि देशों की फिल्में भी प्रदर्शित की गईं। फिल्मों को लेकर निर्माताओं और निर्देशकों के मध्य परिचर्चा भी हुई। कौतिक मेें केरल, बंगलूरू, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से फिल्मकार शामिल हुए। इस अवसर पर शालिनी शाह, सुशील शर्मा (दिल्ली), फिल्म समीक्षक डालटन (केरल), कंचन पंत, (मुंबई) राजेश साह, प्रभात लाल साह गंगोला, ध्रुव टम्टा, सौरभ पंत आदि मौजूद रहे।
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फेस्टिवल छात्रों और युवाओं के लिए आयोजित कर रहे हैं, ताकि उन्हें फिल्म निर्माण का ज्ञान हो सके। युवा देश के साथ ही विदेशी की फिल्में भी देखें। इससे उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
शालिनी शाह, निर्देशक।
फेस्टिवल पिछले चार साल से आयोजित कर रह हैं। प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है पर उत्तराखंड से अपेक्षा के अनुरूप भागीदारी नहीं हो पा रही है। हालांकि इस बार कोविड की वजह से ऐसा हो सकता है। राज्य के फिल्म निर्माताओं को आगे आना होगा। ताकि उत्तराखंड फिल्म निर्माण हब के रुप में विकसित हो सके। राजेश साह, सिनेमैटोग्राफर।
आम तौर पर उत्तराखंड में इस तरह की गतिविधि पहली नहीं देखी हैं। कोरोना के समय व्यक्तिगत प्रयासों से ऐसे आयोजन करना सराहनीय है। राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियां को मजबूत करने के लिए ऐसी गतिविधियां जरूरी हैं। साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।
कंचन पंत (मुंबई)
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विभिन्न क्षेत्रों से आए फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों ने कहा कि कौतिक के जरिये फिल्म निर्माण में कॅरिअर बनाने वालों के लिए अच्छा मौका है। अन्य प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की खूबसूरती को सराहा और कहा कि यहां फिल्म निर्माण की अच्छी संभावना है। इससे क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। कहा कि इस बार कोविड के चलते फिल्में तो देश-विदेश से आई हैं, परंतु फिल्में बनाने में काफी दिक्कतें हुईं।
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उन्होंने कहा कि उत्तराखंड फिल्म निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान है। फेस्टिवल में उत्तराखंड के अलावा देश के विभिन्न प्रदेशों, ईरान, फ्रांस आदि देशों की फिल्में भी प्रदर्शित की गईं। फिल्मों को लेकर निर्माताओं और निर्देशकों के मध्य परिचर्चा भी हुई। कौतिक मेें केरल, बंगलूरू, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से फिल्मकार शामिल हुए। इस अवसर पर शालिनी शाह, सुशील शर्मा (दिल्ली), फिल्म समीक्षक डालटन (केरल), कंचन पंत, (मुंबई) राजेश साह, प्रभात लाल साह गंगोला, ध्रुव टम्टा, सौरभ पंत आदि मौजूद रहे।
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फेस्टिवल छात्रों और युवाओं के लिए आयोजित कर रहे हैं, ताकि उन्हें फिल्म निर्माण का ज्ञान हो सके। युवा देश के साथ ही विदेशी की फिल्में भी देखें। इससे उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
शालिनी शाह, निर्देशक।
फेस्टिवल पिछले चार साल से आयोजित कर रह हैं। प्रशासन का भी सहयोग मिल रहा है पर उत्तराखंड से अपेक्षा के अनुरूप भागीदारी नहीं हो पा रही है। हालांकि इस बार कोविड की वजह से ऐसा हो सकता है। राज्य के फिल्म निर्माताओं को आगे आना होगा। ताकि उत्तराखंड फिल्म निर्माण हब के रुप में विकसित हो सके। राजेश साह, सिनेमैटोग्राफर।
आम तौर पर उत्तराखंड में इस तरह की गतिविधि पहली नहीं देखी हैं। कोरोना के समय व्यक्तिगत प्रयासों से ऐसे आयोजन करना सराहनीय है। राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियां को मजबूत करने के लिए ऐसी गतिविधियां जरूरी हैं। साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।
कंचन पंत (मुंबई)