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मलबे में दफन हो गई दुनिया: बदनसीब ससुर कांपते हाथों से कुरेद रहा मलबा, बुजुर्ग की पुकार- बच्चों, कहां हो तुम?

Wed, 02 Sep 2026 12:31 PM IST
Heera राजेंद्र धानक
राजेंद्र धानक Published by: Heera Updated Wed, 02 Sep 2026 12:31 PM IST
सार

वडयूड़ा गांव में भूस्खलन से घर में मलबा घुस गया, जिससे एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। बुजुर्ग ससुर की आंखें पथरा गई हैं, आंसू सूख चुके हैं, पर वे कांपते हाथों से मलबा कुरेदकर बच्चों को पुकार रहे हैं।

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Father-in-law crying over the death of daughter-in-law and children in almora
शवों को खोजने में जुटी प्रशासन की टीम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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मूसलाधार बारिश की वो काल बनकर आई रात विकासखंड हवालबाग के वडयूड़ा गांव को ऐसा जख्म दे गई जिसकी टीस सदियों तक महसूस की जाएगी। कुदरत के एक बेहद क्रूर और बेरहम प्रहार ने एक ही झटके में एक पूरे हंसते-खेलते संसार को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। घर के भीतर घुसे मलबे ने मीठे सपनों में खोए एक ही परिवार के तीन लोगों को हमेशा के लिए मौत की गहरी नींद सुला दिया। इस रूह कंपा देने वाले मंजर के बदनसीब चश्मदीद बने बुजुर्ग ससुर गुलाब राम के आंसू सूख चुके हैं, पर उनकी पथराई आंखें और कलेजे को चीरती सुबकियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। वे बार-बार मलबे के उस ढेर को अपने कांपते हाथों से कुरेदते हुए बच्चों को पुकार रहे हैं लेकिन वहां पसरे मौत के सन्नाटे से अब उनकी इस बेबस आवाज का जवाब देने वाला कोई जिंदा नहीं बचा।

यह कलेजा चीर देने वाली त्रासदी सोमवार की रात वडयूड़ा गांव में घटी जब रोज की तरह सब कुछ शांत था। रात को बुजुर्ग गुलाब राम ने अपनी बहू प्रेमा देवी, पोती कल्पना और पोते मनीष के साथ आस-पास बैठकर बड़े लाड से रात का भोजन किया था। हंसी-मजाक के बीच निवाले तोड़ते हुए इस बूढ़ी आंखों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि नियति कुछ ही घंटों में उनकी आंखों का तारा और बुढ़ापे की लाठी छीनने वाली है। भोजन के बाद बहू प्रेमा देवी (42), पोती कल्पना आर्या (19) और पोता मनीष कुमार (18) एक कमरे में सोने चले गए जबकि ससुर गुलाब राम पास के ही दूसरे कमरे में चले गए। रात करीब ढाई बजे जब पूरी कायनात गहरी नींद के आगोश में डूबी थी तभी अचानक मौत ने दबे पांव दस्तक दी। घर के पीछे की पहाड़ी भर भराकर टूट गई और भारी मात्रा में कीचड़ और पत्थरों का रेला दीवारें ढहाते हुए सीधे उस कमरे में जा घुसा, जहां मां अपने दोनों बच्चों को सीने से लगाए सो रही थी। मलबे के इस खौफनाक और अचानक हुए हमले ने उन तीनों को चीखने तक का मौका नहीं दिया। ससुर गुलाब राम दूसरे कमरे में होने के कारण इस आफत से शारीरिक रूप से तो बच गए लेकिन मानसिक रूप से वे उसी पल मर गए। मलबे के गिरने की भयानक गड़गड़ाहट से जब उनकी आंख खुली तो सामने का मंजर देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए।

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उनकी आंखों के ठीक सामने उनकी बहू, जवान पोता और पोती मौत के मुंह में समा चुके थे। जिस आंगन को उन्होंने पाई-पाई जोड़कर संवारा था, वह उनकी आंखों के सामने अपनों की कब्रगाह बन चुका था। इस भीषण हादसे ने बुजुर्ग ससुर का पूरा अस्तित्व और संसार ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया। संवाद

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ताउम्र सीने में सालती रहेगी अपनों को न बचा पाने की टीस
बुजुर्ग गुलाब राम को अपनी बहू और बच्चों को अपनी इन बूढ़ी बाहों से न बचा पाने का मलाल अब ताउम्र एक कतरन की तरह सीने में सालता रहेगा। अपनों को खोने के बाद वे जमीन पर सिर पटक-पटक कर रो रहे हैं और अपनी बेबसी पर भाग्य को कोस रहे हैं। वे आसमान की तरफ हाथ उठाकर चीख रहे हैं हे भगवान, तूने ये क्या किया! यदि जान ही लेनी थी तो इस बूढ़े की ले लेता मेरे इन मासूम बच्चों का क्या कसूर था? कम से कम मेरी बहू और बच्चे इस दुनिया को थोड़ा और देख लेते...। गुलाब राम की यह दर्दभरी पुकार और चीखें सुनकर सांत्वना देने पहुंचे ग्रामीणों का कलेजा भी दहल गया और पूरा गांव आंसुओं में डूब गया।

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