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जलवायु परिवर्तन का हिमालय क्षेत्र में व्यापक असर : प्रो. पंत
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:11 PM IST
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एसएसजे परिसर में कार्यशाला को संबोधित करते यूसर्क के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत।
- फोटो : अमर उजाला
कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर में जलवायु परिवर्तन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (यूसर्क) के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न समस्याओं को गंभीर बताते हुए इसके लिए जागरूकता बढ़ाने के साथ ही समय पर जरूरी उपाय करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से हिमालयी क्षेत्र में व्यापक असर पड़ रहा है।
प्रो. पंत ने बताया कि यूसर्क के माध्यम से इसके लिए राज्य के विद्यालयों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यूसर्क द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा कि उनका संस्थान छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए भी कई तरह के कार्यक्रम चला रहा है। इसके लिए विश्व स्तर पर उपाय करने जरूरी हैं। एसएसजे परिसर में स्थित एनआरडीएमएस केंद्र के निदेशक और भूगोलविद प्रो. जेएस रावत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर काफी असर पड़ रहा है।
मौसम चक्र बदलने से भूमिगत जल भंडार खाली हो रहे हैं और निकट भविष्य में पहाड़ी अंचल में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर गैर हिमानी नदियां तेजी से सूख रही हैं। इससे जैव विविधता पर भी असर पड़ेगा और कृषि भी प्रभावित होगी। अन्य वक्ताओं ने भी जलवायु परिवर्तन की समस्या को पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए इससे निपटने के लिए निश्चित कार्ययोजना बनाने की बात कही।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता एसएसजे परिसर में विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. वीपी पांडे ने की। इस मौके पर वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. योगेश जोशी, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. संदीप कुमार, एमएल कनौजिया के अलावा काफी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।
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प्रो. पंत ने बताया कि यूसर्क के माध्यम से इसके लिए राज्य के विद्यालयों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यूसर्क द्वारा चलाई जा रही गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा कि उनका संस्थान छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए भी कई तरह के कार्यक्रम चला रहा है। इसके लिए विश्व स्तर पर उपाय करने जरूरी हैं। एसएसजे परिसर में स्थित एनआरडीएमएस केंद्र के निदेशक और भूगोलविद प्रो. जेएस रावत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर काफी असर पड़ रहा है।
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मौसम चक्र बदलने से भूमिगत जल भंडार खाली हो रहे हैं और निकट भविष्य में पहाड़ी अंचल में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर गैर हिमानी नदियां तेजी से सूख रही हैं। इससे जैव विविधता पर भी असर पड़ेगा और कृषि भी प्रभावित होगी। अन्य वक्ताओं ने भी जलवायु परिवर्तन की समस्या को पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए इससे निपटने के लिए निश्चित कार्ययोजना बनाने की बात कही।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता एसएसजे परिसर में विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. वीपी पांडे ने की। इस मौके पर वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. योगेश जोशी, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. संदीप कुमार, एमएल कनौजिया के अलावा काफी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।