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मशहूर मूर्तिकार और चित्रकार नवीन वर्मा ‘बंजारा’ का निधन
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नवीन वर्मा ‘बंजारा’। फाइल फोटो
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। नगर के मशहूर मूर्तिकार और चित्रकार नवीन वर्मा ‘बंजारा’ का निधन हो गया है। सोमवार को स्थानीय श्मशानघाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 73 वर्षीय बंजारा वाटर कलर और ऑयल पेंटिंग में काफी निपुण थे। बंजारा भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनके द्वारा एआईसी (अल्मोड़ा इंटर कॉलेज) में बनाई गई स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा हमेशा उनकी अद्भुत कलाकारी की याद दिलाती रहेगी।
विवेकानंदपुरी निवासी चित्रकार नवीन वर्मा लोगों के बीच ‘बंजारा’ नाम से जाने जाते थे। वह शहर के मशहूर कलाकारों में से एक थे। उनकी बनाई अद्भुत कृति अल्मोड़ा इंटर कॉलेज में देखने को मिलती है। बंजारा ने इस विद्यालय प्रांगण में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा बनाई है जो उनके द्वारा बनाई गई अनुपम कृतियों में से एक है। बंजारा वाटर कलर और ऑयल पेंटिंग में काफी पारंगत कलाकार थे। प्रसिद्ध जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा भी बंजारा को गुरु कहकर बुलाते थे। उनकी चार पुत्रियां है जो विवाहित हैं। पत्नी इंद्रा वर्मा नगर पालिका सभासद भी रह चुकी हैं। बंजारा अल्मोड़ा इंटर कालेज में कला विषय के सहायक अध्यापक भी रहे। बंजारा के निधन पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, रंगकर्मी मनमोहन चौधरी, छायाकार जयमित्र बिष्ट, दीवान मेहरा आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की है।
बंजारा वन बचाओ और चिपको आंदोलन में भी रहे जेल
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने बताया कि अस्सी के दशक में उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी के बैनर तले चले आंदोलनों में भी नवीन वर्मा बंजारा ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। बंजारा चिपको और वन बचाओ आंदोलनों में भी भागीदारी की। वह लंबे समय तक अल्मोड़ा जेल में भी बंद रहे। जंगलों की नीलामी और औपनिवेशिक शक्ति के खिलाफ चले छात्र, युवा जनांदोलन के दौर में भी वह अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के चलते पुलिस के दमन का शिकार हुए। 1978 में वह आंदोलनकारी बालम सिंह जनौटी, जगमोहन गुरुरानी, प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता पत्रकार जगदंबा प्रसाद जोशी समेत अन्य के साथ अल्मोड़ा जेल में बंद रहे।
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विवेकानंदपुरी निवासी चित्रकार नवीन वर्मा लोगों के बीच ‘बंजारा’ नाम से जाने जाते थे। वह शहर के मशहूर कलाकारों में से एक थे। उनकी बनाई अद्भुत कृति अल्मोड़ा इंटर कॉलेज में देखने को मिलती है। बंजारा ने इस विद्यालय प्रांगण में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा बनाई है जो उनके द्वारा बनाई गई अनुपम कृतियों में से एक है। बंजारा वाटर कलर और ऑयल पेंटिंग में काफी पारंगत कलाकार थे। प्रसिद्ध जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा भी बंजारा को गुरु कहकर बुलाते थे। उनकी चार पुत्रियां है जो विवाहित हैं। पत्नी इंद्रा वर्मा नगर पालिका सभासद भी रह चुकी हैं। बंजारा अल्मोड़ा इंटर कालेज में कला विषय के सहायक अध्यापक भी रहे। बंजारा के निधन पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, रंगकर्मी मनमोहन चौधरी, छायाकार जयमित्र बिष्ट, दीवान मेहरा आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की है।
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बंजारा वन बचाओ और चिपको आंदोलन में भी रहे जेल
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने बताया कि अस्सी के दशक में उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी के बैनर तले चले आंदोलनों में भी नवीन वर्मा बंजारा ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। बंजारा चिपको और वन बचाओ आंदोलनों में भी भागीदारी की। वह लंबे समय तक अल्मोड़ा जेल में भी बंद रहे। जंगलों की नीलामी और औपनिवेशिक शक्ति के खिलाफ चले छात्र, युवा जनांदोलन के दौर में भी वह अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता के चलते पुलिस के दमन का शिकार हुए। 1978 में वह आंदोलनकारी बालम सिंह जनौटी, जगमोहन गुरुरानी, प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता पत्रकार जगदंबा प्रसाद जोशी समेत अन्य के साथ अल्मोड़ा जेल में बंद रहे।
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