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Underworld Don PP: विवादित चेहरों पर पहले भी गर्माता रहा है संत समाज का माहौल, संतों पर भी हो सकती है कार्रवाई

Sat, 07 Sep 2024 11:20 AM IST
हीरा मेहरा राजेश शर्मा, संवाद
राजेश शर्मा, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 07 Sep 2024 11:20 AM IST
सार

अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी को संत समाज की सदस्यता दिलाने को लेकर उठ रहा विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी कई विवादित चेहरों को अखाड़ों में शामिल करने को लेकर विवाद होते रहे हैं।

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Controversy is arising over granting membership to underworld don Prakash Pandey in Sant Samaj
अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी को संत समाज की सदस्यता दिलाने को लेकर उठ रहा विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी कई विवादित चेहरों को अखाड़ों में शामिल करने को लेकर विवाद होते रहे हैं। करीब डेढ़ दशक पहले चर्चित महिला संत राधे मां को संत समाज के एक अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाने का विवाद खूब चर्चित रहा था। बाद में अखाड़े को राधे मां से किनारा करना पड़ा था। कुछ वर्ष पूर्व हरिद्वार के एक बड़े संत की ओर से गाजियाबाद के शराब माफिया को दीक्षा देकर संत का चोला पहनाने का विवाद भी खूब चर्चा में रहा था।

वहीं भाजपा के पूर्व विधायक रविदासाचार्य सुरेश राठौर को भी जब निरंजनी अखाड़े की ओर से अपने अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने की घोषणा की गई थी तो उस पर विवाद हो गया था। बाद में सुरेश राठौर और अखाड़े ने अपने आप को एक दूसरे से अलग कर लिया था। 

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ये पढ़ें- Almora News: अंडर वर्ल्ड डॉन पीपी बना जूना अखाड़े के कई मठों और आश्रमों के उत्तराधिकारी, जेल में ली दीक्षा

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बोले राजेंद्र गिरि, कोई और भी आना चाहे तो स्वागत
पीपी पांडे को जूना अखाड़े में शामिल करने पर जहां संतों से जवाब देते नहीं बन रहा है वहीं उन्हें दीक्षा देने वाले जूना अखाड़े के थानापति महंत राजेंद्र गिरि अपने निर्णय पर अडिग हैं।

उन्होंने तो अन्य लोगों को भी अपने साथ जुड़ने का खुला ऑफर दिया है। फोन पर हुई बात में महंत राजेंद्र गिरि ने कहा कि वे जूना अखाड़े के महंत हैं। पीपी को दीक्षा देकर उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। कोई अगर गलत रास्ता छोड़कर धर्म के मार्ग पर चलना चाहता है तो उसे मौका दिया जाना चाहिए। कहा कि अपराध के शिकंजे में जकड़ा कोई और व्यक्ति भी अगर गलत काम छोड़कर धर्म-कर्म के रास्ते पर चलना चाहता है तो वे उसका भी स्वागत करेंगे। 

पीपी मामले को लेकर संत समाज बेचैन
पीपी मामले को लेकर संत समाज में बेचैनी है। अखाड़े के शीर्ष महंतों ने इस मुद्दे से किनारा कर लिया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बचते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह मामला जूना अखाड़े का अंदरूनी मामला है। उनके संत ही इस बारे में कोई टिप्पणी कर सकते हैं।

परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री और अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्री महंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि इस मामले का अखाड़े से कोई लेना देना नहीं है। अखाड़े के सचिव महंत महेश पुरी ने भी कहा कि अखाड़े का इस मामले से कोई सरोकार नहीं है।



संतों पर भी हो सकती है कार्रवाई
पीपी को जेल में दीक्षा देने वाले संतों पर भी जूना अखाड़ा कार्रवाई कर सकता है। अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरीगिरी महाराज ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। सात वरिष्ठ संतो की समिति बनाई गई है। जांच में यह पाया गया कि उन्होंने किसी लालच अथवा पैसा लेकर किसी आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को दीक्षा दी है तो उन्हें अखाड़े से भी बाहर किया जा सकता है।

यह था मामला
पीपी को बृहस्पतिवार को कुछ संतों ने जेल में पहुंचकर दीक्षा दी थी और जूना अखाड़े का सदस्य बनाया था। बाद में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उसे पांच मठों का उत्तराधिकारी बनाने की बात भी कही थी। जेल प्रशासन भी इस तरह की गतिविधि को लेकर अचंभित है।

 

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