{"_id":"ba6dd1a83f19a6ed6348444e0b2e27a6","slug":"built-heritage-museum-iron-boat-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संग्रहालय की धरोहर बनी लोहे की नाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संग्रहालय की धरोहर बनी लोहे की नाव
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Sun, 24 May 2015 11:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुछ समय पूर्व नानकमत्ता के पास मिली करीब सौ साल पुरानी मिली लोहे की नाव अब अल्मोड़ा संग्रहालय की धरोहर बन गई है। लोहे की नाव को पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा ले आया है। यह नाव जल्द ही लोगों को संग्रहालय में देखने के लिए मिलेगी।
विज्ञापन
नानकसागर डैम के निर्माण के दौरान लोहे की नाव खुदाई में मिली थी। कुछ समय पहले नानकमत्ता से लगे खमरिया गांव के कुछ लोग इस नाव को उठाकर गांव में ले गए थे। सूचना मिलने पर पुरातत्व विभाग के अन्वेषण सहायक चंद्र सिंह चौहान ने खमरिया गांव पहुंचकर इस नाव के पारे में अध्ययन किया। उनकी रिपोर्ट पर पुरातत्व विभाग ने नाव को अल्मोड़ा स्थित राजकीय संग्रहालय लाने का फैसला लिया।
विज्ञापन
संग्रहालय के प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी ने बताया कि लोहे की इस नाव की लंबाई साढ़े पांच मीटर और वजन करीब 25 से 30 कुंतल है। उन्होंने कहा कि नाव को अल्मोड़ा ले आया गया है। जल्द ही इसे संग्रहालय परिसर में रखा जाएगा। नाव को रखने के लिए संग्रहालय परिसर में सेड बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नाव करीब सौ साल पुरानी है।
विज्ञापन