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प्रसव के बाद नहीं रुकी महिला की ब्लीडिंग, हल्द्वानी ले जाते वक्त तोड़ा रास्ते में दम
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अल्मोड़ा। प्रसव के बाद लगातार रक्तस्राव होने पर हल्द्वानी रेफर की गई प्रसूता ने रास्ते में दम तोड़ दिया। को हल्द्वानी रेफर किया गया, लेकिन उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने एक बच्ची को आंख खोलने से पहले ही मां की ममता से जुदा कर दिया।
यहां गंगोला मोहल्ला निवासी सुमित जगाती अपनी पत्नी रेनू जगाती को प्रसव के लिए महिला अस्पताल लाए। दोपहर बाद महिला का आपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया लेकिन प्रसव के बाद भी खून बहना बंद नहीं हुआ। डाक्टरों ने रक्तस्राव रोकने की कोशिशें की। बेस अस्पताल से भी डाक्टर बुलाए गए, लेकिन खून नहीं रुका तो डाक्टरों ने रेनू को हल्द्वानी रेफर कर दिया। परिजन 108 एंबुलेंस से रेनू को हल्द्वानी ले जा रहे थे, लेकिन उसने भवाली पहुंचते ही दम तोड़ दिया।
महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. दीपक गर्बयाल ने बताया कि रेनू का पूर्व में भी आपरेशन हो चुका है। डिलीवरी के बाद महिला का खून बहना बंद नहीं हो रहा था। 37 वर्षीय महिला की हालत ठीक नहीं थी, इसीलिए उसे दो बोतल खून चढ़ाया गया, लेकिन हालत और बिगड़ने लगी, जिसके चलते उसे हल्द्वानी रेफर करना पड़ा। 108 एंबुलेंस में भी महिला को एक बोतल खून लगाकर भेजा गया, उन्होंने बताया कि इस तरह के मामले बहुत कम होते हैं। एक हजार महिलाओं में से किसी एक को इस तरह की दिक्कतें आती हैं। रेनू का पहला बच्चा भी आपरेशन से हुआ था।
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यहां गंगोला मोहल्ला निवासी सुमित जगाती अपनी पत्नी रेनू जगाती को प्रसव के लिए महिला अस्पताल लाए। दोपहर बाद महिला का आपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया लेकिन प्रसव के बाद भी खून बहना बंद नहीं हुआ। डाक्टरों ने रक्तस्राव रोकने की कोशिशें की। बेस अस्पताल से भी डाक्टर बुलाए गए, लेकिन खून नहीं रुका तो डाक्टरों ने रेनू को हल्द्वानी रेफर कर दिया। परिजन 108 एंबुलेंस से रेनू को हल्द्वानी ले जा रहे थे, लेकिन उसने भवाली पहुंचते ही दम तोड़ दिया।
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महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. दीपक गर्बयाल ने बताया कि रेनू का पूर्व में भी आपरेशन हो चुका है। डिलीवरी के बाद महिला का खून बहना बंद नहीं हो रहा था। 37 वर्षीय महिला की हालत ठीक नहीं थी, इसीलिए उसे दो बोतल खून चढ़ाया गया, लेकिन हालत और बिगड़ने लगी, जिसके चलते उसे हल्द्वानी रेफर करना पड़ा। 108 एंबुलेंस में भी महिला को एक बोतल खून लगाकर भेजा गया, उन्होंने बताया कि इस तरह के मामले बहुत कम होते हैं। एक हजार महिलाओं में से किसी एक को इस तरह की दिक्कतें आती हैं। रेनू का पहला बच्चा भी आपरेशन से हुआ था।
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