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जीआईसी को अटल उत्कृष्ट का दर्जा दिया लेकिन रखरखाव की सुध नहीं ली
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अल्मोड़ा जीआईसी का जर्जर भवन।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। नगर के एतिहासिक भवन में संचालित हो रहे राजकीय इंटर कॉलेज को अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा दिया गया है लेकिन शिक्षा विभाग और शासन स्तर पर इसके रखरखाव के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उपेक्षा के चलते छात्र जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल के कुछ भवनों की स्थिति इतनी जर्जर है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा में वर्तमान में 40 शिक्षक स्कूल के 600 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। कार्यालय स्टाफ भी स्कूल में तैनात है। एक अप्रैल से स्कूल को अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा भी दे दिया गया है। इसके तहत स्कूल में कक्षा छह से हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही माध्यम से कक्षाएं संचालित होंगी।
इन सब अच्छाइयों के बीच एक कमी है जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। दरअसल स्कूल की भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, पुराना संगीत कक्ष, ऑडिटोरियम इतनी जर्जर स्थिति में है कि कभी भी इसका भवन गिर सकता है।
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कई कक्षाओं को दूसरे भवनों में किया गया शिफ्ट
अल्मोड़ा। भवनों की जर्जर स्थिति देखते हुए कई कक्षाओं को दूसरे भवनों में शिफ्ट किया गया है। चहारदीवारी नहीं होने से अक्सर असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में घुसते हैं और प्रयोगशाला में तोड़फोड़ भी कर देते हैं। स्कूल प्रबंधन लंबे समय से भवनों के रखरखाव और चहारदीवारी के लिए शासन और प्रशासन स्तर पर पत्राचार कर चुका है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
एतिहासिक भवन को संरक्षित करने के भी नहीं हो रहे प्रयास
करीब 132 साल पहले 1889 में राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा की शुरूआत हाईस्कूल के साथ हुई थी। 1921 से यहां इंटर की कक्षाएं भी संचालित होने लगी। स्कूल से निकली कई प्रतिभाओं ने देश-विदेश में अल्मोड़ा की शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान दी। पुरातत्व विभाग भी स्कूल के भवनों का सर्वे कर चुका है लेकिन इस एतिहासिक भव न को संरक्षित करने की कवायद शुरू नहीं हुई।
विद्यालय के कई भवन काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। भवनों की मरम्मत आदि के लिए शासन, प्रशासन स्तर तक कई बार पत्राचार किया जा चुका है। शिक्षा मंत्री को भी स्कूल की स्थिति और समस्या बताई है लेकिन स्कूल के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
- मदन सिंह मेर, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा
जिले में कई विद्यालयों का रखरखाव किया जाना है जिनकी सूची में जीआईसी अल्मोड़ा को भी रखा गया है। स्कूल भवनों के रखरखाव और चहारदीवारी के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन स्तर पर प्रस्ताव मांगने पर भेजा जाएगा।
- एचबी चंद, जिला शिक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा।
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राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा में वर्तमान में 40 शिक्षक स्कूल के 600 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। कार्यालय स्टाफ भी स्कूल में तैनात है। एक अप्रैल से स्कूल को अटल उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा भी दे दिया गया है। इसके तहत स्कूल में कक्षा छह से हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही माध्यम से कक्षाएं संचालित होंगी।
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इन सब अच्छाइयों के बीच एक कमी है जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। दरअसल स्कूल की भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, पुराना संगीत कक्ष, ऑडिटोरियम इतनी जर्जर स्थिति में है कि कभी भी इसका भवन गिर सकता है।
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कई कक्षाओं को दूसरे भवनों में किया गया शिफ्ट
अल्मोड़ा। भवनों की जर्जर स्थिति देखते हुए कई कक्षाओं को दूसरे भवनों में शिफ्ट किया गया है। चहारदीवारी नहीं होने से अक्सर असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में घुसते हैं और प्रयोगशाला में तोड़फोड़ भी कर देते हैं। स्कूल प्रबंधन लंबे समय से भवनों के रखरखाव और चहारदीवारी के लिए शासन और प्रशासन स्तर पर पत्राचार कर चुका है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
एतिहासिक भवन को संरक्षित करने के भी नहीं हो रहे प्रयास
करीब 132 साल पहले 1889 में राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा की शुरूआत हाईस्कूल के साथ हुई थी। 1921 से यहां इंटर की कक्षाएं भी संचालित होने लगी। स्कूल से निकली कई प्रतिभाओं ने देश-विदेश में अल्मोड़ा की शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान दी। पुरातत्व विभाग भी स्कूल के भवनों का सर्वे कर चुका है लेकिन इस एतिहासिक भव न को संरक्षित करने की कवायद शुरू नहीं हुई।
विद्यालय के कई भवन काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। भवनों की मरम्मत आदि के लिए शासन, प्रशासन स्तर तक कई बार पत्राचार किया जा चुका है। शिक्षा मंत्री को भी स्कूल की स्थिति और समस्या बताई है लेकिन स्कूल के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
- मदन सिंह मेर, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा
जिले में कई विद्यालयों का रखरखाव किया जाना है जिनकी सूची में जीआईसी अल्मोड़ा को भी रखा गया है। स्कूल भवनों के रखरखाव और चहारदीवारी के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन स्तर पर प्रस्ताव मांगने पर भेजा जाएगा।
- एचबी चंद, जिला शिक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा।