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Almora News: 82 की उम्र में तकली से जनेऊ बनाकर दे रहे आत्मनिर्भरता का संदेश
Sun, 24 May 2026 09:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 24 May 2026 09:31 PM IST
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो उम्र भी उसके हौसले के आगे छोटी पड़ जाती है। इसका उदाहरण विजयपुर (धनखलगांव) निवासी 82 वर्षीय पूर्व सैनिक दामोदर भट्ट पेश कर रहे हैं। एसएसबी से वर्ष 1990 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे आज तकली (कतुवा) से जनेऊ बनाकर आत्मनिर्भरता और श्रम का संदेश दे रहे हैं।
दामोदर भट्ट गांव हो या बाजार, किसी भी कार्यक्रम में अपने हाथों से तकली चलाते नजर आते हैं। सफेद धोती, पीला कुर्ता, वास्कट, टोपी, कंधे पर गायत्री परिवार का झोला और हाथ में तकली लिए उनकी पहचान क्षेत्र में अलग ही दिखाई देती है। दामोदर भट्ट ने बताया कि वे प्रतिदिन करीब 10 घंटे मेहनत कर 20 जनेऊ तैयार करते हैं जिससे उन्हें लगभग चार हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो जाती है। उन्होंने बताया कि उनके बनाए जनेऊ द्वाराहाट और आसपास के क्षेत्रों के अलावा लखनऊ, चंडीगढ़ समेत अन्य शहरों में रहने वाले प्रवासियों और पंडितों की ओर से भी मंगाए जाते हैं। वे शांतिकुंज हरिद्वार से भी जुड़े हैं और अखंड ज्योति पत्रिका को लोगों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी मेहनत और सादगी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
दामोदर भट्ट गांव हो या बाजार, किसी भी कार्यक्रम में अपने हाथों से तकली चलाते नजर आते हैं। सफेद धोती, पीला कुर्ता, वास्कट, टोपी, कंधे पर गायत्री परिवार का झोला और हाथ में तकली लिए उनकी पहचान क्षेत्र में अलग ही दिखाई देती है। दामोदर भट्ट ने बताया कि वे प्रतिदिन करीब 10 घंटे मेहनत कर 20 जनेऊ तैयार करते हैं जिससे उन्हें लगभग चार हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो जाती है। उन्होंने बताया कि उनके बनाए जनेऊ द्वाराहाट और आसपास के क्षेत्रों के अलावा लखनऊ, चंडीगढ़ समेत अन्य शहरों में रहने वाले प्रवासियों और पंडितों की ओर से भी मंगाए जाते हैं। वे शांतिकुंज हरिद्वार से भी जुड़े हैं और अखंड ज्योति पत्रिका को लोगों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उनकी मेहनत और सादगी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
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