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विधानसभा भवन निर्माण में चुनौतियों का पहाड़

Sat, 23 May 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ चौखुटिया (अल्मोड़ा)
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ चौखुटिया (अल्मोड़ा) Updated Sat, 23 May 2015 12:07 AM IST
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Assembly building challenges the mountain

भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन आदि निर्माण कार्यों में जुटी निर्माण कंपनी के सामने अगले साल अप्रैल तक कार्य पूरा करने की चुनौती के साथ ही दिक्कतें भी कम नही हैं। विशेष रूप से पानी की किल्लत का आलम यह है कि बृहस्पतिवार को मजदूर खाना भी नहीं बना पाए थे।

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बतौर सीएम प्रतिनिधि भराड़ीसैंण पहुंचे पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को निर्माण एजेंसी के अधिकारियों ने कार्य प्रगति की जानकारी के साथ दिक्कतें भी बताईं।  चमोली जिले के गैरसैंण से लगे भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन का निर्माण कार्य जोरों से चल रहा है। परिसर के निकट बने सेना के दो टावरों के शिफ्ट होने के बाद कार्य में तेजी आई है।
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निर्माण एजेंसी एनबीसीसी को अप्रैल 2016 तक कार्य पूरा करना है। परंतु पिछले दिनों हुई लगातार बारिश और पानी की स्थायी व्यवस्था न होने से निर्माण एजेंसी को आए दिन कई तरह की दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के जनरल मैनेजर नरेंद्र लखचौरा ने बताया कि बृहस्पतिवार को पानी की आपूर्ति न होने से मजदूर सुबह का नाश्ता नहीं बना पाए और भूखे पेट ही काम में जुटे रहे।
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इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कार्य किन परिस्थितियों में किया जा रहा है। सीएम हरीश रावत के प्रतिनिधि के तौर पर कार्यों का जायजा लेने पहुंचे पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को निर्माण एजेंसी के अधिकारियों ने समस्याएं बताते हुए निदान करवाने को कहा। टम्टा ने मौके से ही सीएम रावत से फोन पर बात कर उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत कराया।

भराड़ीसैंण में 110 करोड़ की लागत के विधानसभा भवन आदि निर्माण कार्यों में एनबीसीसी के 40 इंजीनियर, 50 फील्ड कर्मचारी, 300 मजदूर जुटे हैं। आठ पोकलैंड मशीनें, छह जेसीबी, 20 ट्रक लगे हुए हैं। कंपनी के तीन जनरेटर रात, दिन चालू हैं। प्रतिदिन दो हजार से तीन हजार लीटर के बीच डीजल की खपत है, जिसकी आपूर्ति सीधे हिंदुस्तान पेट्रोलियम के माध्यम से हो रही है।

निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों का कहना है कि सरकार द्वारा पेयजल के लिए साढे़ तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया है। परंतु जल संस्थान पानी की व्यवस्था नहीं कर पाया है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों का रवैया असहयोगात्मक है। कंपनी ने दूधातोली से अपने संसाधनों से अस्थायी व्यवस्था की है। इसमें आए दिन दिक्कत हो रही है।


इसी तरह लोक निर्माण विभाग द्वारा महज डेढ़ किलोमीटर सड़क बनाई जानी है, परंतु उसमें भी कछुआ चाल से काम चल रहा है। इसी तरह बैंकिंग सुविधा का अभाव होने से भी कर्मचारी परेशान हैं। 14 किमी दूर गैरसैंण में बैंक है। परंतु उसमें जरूरत पर धनराशि उपलब्ध नहीं रहती है।

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