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Almora News: अल्मोड़ा में उम्र पार कर चुकी है ऐतिहासिक जेल, नवनिर्माण का प्रस्ताव फाइलों में कैद

Sun, 17 Mar 2024 12:48 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 17 Mar 2024 12:48 AM IST
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Almora Jail Had More inmates than Authorised
1872 में बनी जिला जेल हो चुकी है बदहाल, क्षमता से अधिक कैदियों को रखना मजबूरी
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अल्मोड़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को समेटने और सहेजने वाली ऐतिहासिक जिला जेल के भवन, छत और दीवारें अपनी उम्र पार कर चुकी हैं लेकिन इसके नवनिर्माण का प्रस्ताव सरकारी फाइलों में कैद है। बदहाल जिला जेल में क्षमता से दोगुने कैदियों को रखना जेल प्रशासन की मजबूरी बन चुका है।
अल्मोड़ा जेल का निर्माण वर्ष 1872 में अंग्रेजों ने कराया था। अगस्त क्रांति की गवाह रही इस जेल में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, हरगोविन्द पंत, विक्टर मोहन जोशी, देवी दत्त पंत, अब्दुल गफ्फार खां सहित सैकड़ों आंदोलनकारियों ने इस जेल में रहकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी। 152 साल बाद अपनी उम्र पार कर चुकी इस जेल की छत, भवन और दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। देश के इतिहास का गवाह इस जेल के नवनिर्माण के अब तक प्रयास नहीं हुए। ऐतिहासिक जेल की क्षमता सिर्फ 102 कैदियों और बंदियों की है, लेकिन वर्तमान में यह जेल 320 कैदियों और बंदियों का आशियाना बनी है।
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कैदियों को सिखाए जा रहे हैं स्वरोजगार के गुर
अल्मोड़ा। कैदियों और बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जेल प्रशासन ने अपने प्रयास से उन्हें स्वरोजगार के गुर सिखाने की पहल शुरू की है। प्रशासन के सहयोग से स्वायत्त सहकारिता का गठन किया गया है। इस ऐतिहासिक जेल में मौजूद कैदी और बंदी पैन स्टैंड, वॉल आर्ट्स, गुलदस्ते, टोकरी सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रहे हैं, इन्हें आउटलेट के माध्यम से बेचा जा रहा है। कैदी और बंदी जेल में मशरूम उत्पादन कर रहे हैं, इसकी बाजार में खासी मांग है। जेल प्रशासन के मुताबिक इन उत्पादों से होनी वाली आय को कैदियों के खाते में जमा किया जाता है। कैदियों को स्वरोजगार के गुर सिखाना उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की पहल है।
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राज्यपाल से मिले एक लाख रुपये
अल्मोड़ा। जिला जेल में कैदियों और बंदियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए जेल प्रशासन उन्हें कच्चा माल उपलब्ध करा रहा है। उत्पाद तैयार करने के लिए बांस, लकड़ी, रंग सहित अन्य जरूरी सामग्री जेल प्रशासन के सहयोग से उपलब्ध हो रही है। इसी बीच राज्यपाल की तरफ से एक लाख रुपये की धनराशि जेल प्रशासन को मिली है जो कैदियों और बंदियों को स्वरोजगार से जोड़ने में खर्च की जाएगी।

कोट- निश्चित तौर पर जिला जेल अपनी अवधि यानि उम्र पार कर चुकी है। इसके नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बंदियों और कैदियों को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल शुरू की है।
जयंत पांगती, जेल अधीक्षक, जिला जेल, अल्मोड़ा।
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