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Almora News: चंदन की खेती से किसान ने किया आय सृजन
Thu, 05 Jun 2025 11:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 05 Jun 2025 11:49 PM IST
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अल्मोड़़ा। एक किसान ने चंदन की खेती से आय सृजन किया। किसान ने कृषि में किए नवाचार को संवाद के दौरान साझा किया।
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के फसल सुधार विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल कुमार हेडाउ के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने भिकियासैंण ब्लॉक के बाड़ीकोट के किसान आनंद सिंह से संवाद किया।
इस दौरान आनंद ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए चंदन की खेती के माध्यम से आय सृजन की दिशा में नवाचार किया है। उन्होंने आठ से 10 नाली क्षेत्रफल में लगी चंदन की फसल से हर साल सात से आठ लाख की आय अर्जित की।
उन्होंने बताया कि चंदन के पौधों को जानवर भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसकी खेती पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। अभियान के सातवें दिन संस्थान के वैज्ञानिकों ने अल्मोड़ा और चमोली जिले के चार ब्लॉकों के 19 गांवों के 463 किसानों से सीधा संवाद किया।
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उन्हें खरीफ फसलों मडुआ, मादिरा, दलहन और सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों, उनकी सस्य एवं सुरक्षा तकनीकों की जानकारी देकर कृषि में नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। किसानों को श्रम और समय की बचत करने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. केके मिश्रा ने एकीकृत रोग प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल उपायों, रोगों की समय से पहचान कर हानिकारक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी।
मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन को पर्वतीय किसानों की आजीविका सुरक्षा का साधन बताया। इसके अलावा नर्सरी प्रबंधन, मौसमी फसल योजना और पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन की जानकारी दी।
फसल चक्र और जैव उर्वरकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य और दीर्घकालीन उत्पादकता बनाए रखने की सलाह दी। चमोली के परसारी व मेरग गांव में विशेषज्ञों ने 136 जनजातीय किसानों से संवाद किया। उन्हें मटर, पत्ता गोभी, मूली, धनिया के बीजों के साथ-साथ किल्टा टोकरी, फल, सब्जी की क्रेट्स बांटीं।
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विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के फसल सुधार विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल कुमार हेडाउ के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने भिकियासैंण ब्लॉक के बाड़ीकोट के किसान आनंद सिंह से संवाद किया।
इस दौरान आनंद ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए चंदन की खेती के माध्यम से आय सृजन की दिशा में नवाचार किया है। उन्होंने आठ से 10 नाली क्षेत्रफल में लगी चंदन की फसल से हर साल सात से आठ लाख की आय अर्जित की।
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उन्होंने बताया कि चंदन के पौधों को जानवर भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसकी खेती पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। अभियान के सातवें दिन संस्थान के वैज्ञानिकों ने अल्मोड़ा और चमोली जिले के चार ब्लॉकों के 19 गांवों के 463 किसानों से सीधा संवाद किया।
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उन्हें खरीफ फसलों मडुआ, मादिरा, दलहन और सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों, उनकी सस्य एवं सुरक्षा तकनीकों की जानकारी देकर कृषि में नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। किसानों को श्रम और समय की बचत करने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. केके मिश्रा ने एकीकृत रोग प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल उपायों, रोगों की समय से पहचान कर हानिकारक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी।
मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन को पर्वतीय किसानों की आजीविका सुरक्षा का साधन बताया। इसके अलावा नर्सरी प्रबंधन, मौसमी फसल योजना और पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन की जानकारी दी।
फसल चक्र और जैव उर्वरकों के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य और दीर्घकालीन उत्पादकता बनाए रखने की सलाह दी। चमोली के परसारी व मेरग गांव में विशेषज्ञों ने 136 जनजातीय किसानों से संवाद किया। उन्हें मटर, पत्ता गोभी, मूली, धनिया के बीजों के साथ-साथ किल्टा टोकरी, फल, सब्जी की क्रेट्स बांटीं।