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सीएम की घोषणा के बाद भी नहीं बन सकी धर्मशाला
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Updated Wed, 19 Oct 2016 11:40 PM IST
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राहगीरों के टिकने के लिए नगर में धर्मशाला तक नहीं है। पूर्व में मालरोड में स्थित जीर्ण पड़ी दो धर्मशालाएं तोड़ दी गई थीं। उनके स्थान पर नई धर्मशालाएं बनाने की योजना आज तक अधर में हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2014 में धर्मशाला के पुनर्निर्माण के लिए 1.48 लाख की घोषणा हुई थी, लेकिन वह पैसा अभी तक नहीं मिल सका है जिसकी वजह से निर्माण कार्य आज तक नहीं हो सका है।
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अल्मोड़ा नगर में राहगीरों के ठहरने के लिए कोई धर्मशाला नहीं है। जिससे खासतौर पर गरीब लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर ठंड के मौसम में राहगीरों के लिए कोई भी शरण स्थल नहीं है। मालूम हो कि नगर के बद्रेश्वर मंदिर के पास स्थित पुरानी धर्मशाला जीर्ण होने के कारण खंडहर में तब्दील हो गई थी। इसलिए पालिका परिषद ने पुरानी धर्मशाला के स्थान पर नई धर्मशाला बनाने का फैसला किया था।
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कुछ साल पहले धर्मशाला के लिए आई धनराशि को तत्कालीन पालिका परिषद द्वारा दूसरे मद में खर्च कर दिया गया। उसके बाद पालिका परिषद पदाधिकारियों समेत विभिन्न संगठनों के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री से नगर में धर्मशाला के पुनर्निर्माण की मांग की थी। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में 2014 में अल्मोड़ा में हुई कैबिनेट की बैठक में अल्मोड़ा में धर्मशाला के पुनर्निर्माण को हरी झंडी देकर 1.48 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
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धर्मशाला के निर्माण की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को दी गई थी, लेकिन आज तक उक्त धनराशि आवंटित नहीं हुई है। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि धर्मशाला के पुनर्निर्माण को लेकर शासन को कई बार लिखा जा चुका है और मुख्यमंत्री से भी निर्माण के लिए धन मुक्त करने का अनुरोध किया जा चुका है लेकिन अभी तक बजट नहीं आया है। जिससे धर्मशाला का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।