डोल आश्रम में रामकथा सुनने उमड़ रही लोगों की भीड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम कनरा डोल आश्रम में आठवें दिन श्री राम कथा सुनाते हुए प्रसिद्ध रामकथा वाचक संत मुरारी बापू ने कहा कि सत्य की ध्वजा फहराने वालों को अवसरवाद के पीछे नहीं जाना चाहिए। साधना तो चित्त और शुद्धि के लिए है। श्री यंत्र के पीछे विज्ञान भी काम कर रहा है। श्री रामचरित मानस में नौ सम्राटों की कथा है। इसमें दो राजा और भी हैं जो आध्यात्मिक सम्राट हैं। एक राजा माया से उत्पन्न किया गया काल्पनिक सम्राट है। मानसश्री में देवराज इंद्र की कथा भी बीच-बीच में आती है। मानस की कथा में पहला सम्राट हिमाल, दूसरा महिपति महाराजा मनु, तीसरा सार्वभौम राम पिता दशरथ, चौथा जनक, पांचवां लंकेश, छठा बाली, सातवां सुग्रीव, आठवां विभीषण, नौवां अंगद है।
जिस घर में नारी नहीं पूजी जाती है वहा देवता भी निवास नहीं करते हैं। जिसके पास कुछ है वह गर्व करे तो यह सराहनीय तो नहीं, लेकिन क्षम्य तो है। जिस घर में सब लोग खुश रहते और संस्कारी होते हैं समझो वहां श्री है। जो गुरु की शरण में शरणागत है वह अमीर है। रोने के दो कारण होते हैं। पहला कि हम आपके कारण जी रहेे थे। दूसरा यह है कि मैंने इतनी बडी संपदा की सेवा की फिर भी उसे पहचान नहीं सका।
किसी बुद्ध पुरुष को कष्ट नहीं देना चाहिए। उनके मुख से जो भी शब्द निकल जाए उसको प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। गुरु फल नहीं देते बल्कि सुफल देते हैं। भरत की यात्रा प्रभु श्री राम को पाने जबकि हनुमान की यात्रा सीता को खोजने के लिए थी। रामकथा आंसुओं, त्याग, समर्पण और प्रेम की कथा है। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, वित्त मंत्री प्रकाश पंत, सांसद भगत सिंह कोश्यारी, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल मौजूद थे।