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धौलादेवी के पांच अस्पतालों में डॉक्टर ही नहीं
Almora
Updated Tue, 19 Nov 2013 05:45 AM IST
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अल्मोड़ा। धौलादेवी ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाएं लंबे समय से खस्ताहाल हैं। क्षेत्र के आठ अस्पतालों में से पांच अस्पतालों में डाक्टर ही नहीं। नौ वर्ष पहले स्वीकृत विकासखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौलादेवी का अब तक उच्चीकरण नहीं हो सका है। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए 70 किमी दूर अल्मोड़ा जाना लोगों की मजबूरी है।
ब्लॉक मुख्यालय धौलादेवी प्राथमिक अस्पताल में डाक्टरोें के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन पिछले लंबे समय से यहां एक ही चिकित्सक कार्यरत हैं। अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 150 से 200 रोगी पहुंचते हैं। इन रोगियों के परीक्षण के अलावा अस्पताल में तैनात डाक्टर को बीमारी फैलने पर गांवों, दुर्घटनाओं के दौरान मौके पर, समय-समय पर आयोजित शिविरों के अलावा बैठकों में जाना पड़ता है। इससे मरीजों को काफी दिक्कतें होती हैं।
शासन ने 2004 में धौलादेवी पीएचसी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण की मंजूरी दी। इसके बाद भवन निर्माण को बजट भी दिया। वर्तमान में मुख्य भवन बन कर तैयार हो गया है लेकिन नौ सालों बाद भी अस्पताल सीएचसी में अपग्रेड नहीं हो सका है। इस कारण अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि संसाधन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। मकड़ाऊं, सिमलखेत, नैनी आदि दूरस्थ क्षेत्र के मरीजों को 70 किमी से अधिक दूरी तय कर अल्मोड़ा जाना पड़ता है। ध्याड़ी, पनुवानौला अस्पताल में एक-एक संविदा डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा दन्यां, भनोली, चेलछीना, नैनी, खेती अस्पतालों में सालों से डाक्टर नहीं हैं। फार्मासिस्टों के सहारे ही यह अस्पताल चल रहे हैं।
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धौलादेवी के चिकित्साधिकारी डा. बीबी जोशी ने बताया कि ध्याड़ी और पनुवानौला अस्पतालों में संविदा डाक्टरों की तैनाती हो गई है। अस्पतालों में डाक्टरों के रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर शासन को भेजी जाती है।
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ब्लॉक मुख्यालय धौलादेवी प्राथमिक अस्पताल में डाक्टरोें के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन पिछले लंबे समय से यहां एक ही चिकित्सक कार्यरत हैं। अस्पताल में औसतन प्रतिदिन 150 से 200 रोगी पहुंचते हैं। इन रोगियों के परीक्षण के अलावा अस्पताल में तैनात डाक्टर को बीमारी फैलने पर गांवों, दुर्घटनाओं के दौरान मौके पर, समय-समय पर आयोजित शिविरों के अलावा बैठकों में जाना पड़ता है। इससे मरीजों को काफी दिक्कतें होती हैं।
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शासन ने 2004 में धौलादेवी पीएचसी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण की मंजूरी दी। इसके बाद भवन निर्माण को बजट भी दिया। वर्तमान में मुख्य भवन बन कर तैयार हो गया है लेकिन नौ सालों बाद भी अस्पताल सीएचसी में अपग्रेड नहीं हो सका है। इस कारण अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि संसाधन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। मकड़ाऊं, सिमलखेत, नैनी आदि दूरस्थ क्षेत्र के मरीजों को 70 किमी से अधिक दूरी तय कर अल्मोड़ा जाना पड़ता है। ध्याड़ी, पनुवानौला अस्पताल में एक-एक संविदा डाक्टर तैनात हैं। इसके अलावा दन्यां, भनोली, चेलछीना, नैनी, खेती अस्पतालों में सालों से डाक्टर नहीं हैं। फार्मासिस्टों के सहारे ही यह अस्पताल चल रहे हैं।
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धौलादेवी के चिकित्साधिकारी डा. बीबी जोशी ने बताया कि ध्याड़ी और पनुवानौला अस्पतालों में संविदा डाक्टरों की तैनाती हो गई है। अस्पतालों में डाक्टरों के रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर शासन को भेजी जाती है।