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मोहल्ले में तेंदुआ, घंटों अफरातफरी
Almora
Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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अल्मोड़ा। एक तेंदुआ बृहस्पतिवार को जंगल से भटककर यहां दुगालखोला मोहल्ले में आ धमका। इससे मोहल्ले में दिनभर कौतूहल और अफरातफरी का माहौल रहा। वन कर्मियों ने पांच घंटे की मशक्कत के बाद ट्रेंकुलाइजर से बेहोश कर तेंदुए को पिंजरे में कैद दिया। तेंदुआ स्वस्थ है, विभाग उसे शीघ्र ही जंगल में छोड़ेगा।
बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे दुगालखोला में प्रो. देव सिंह पोखरिया के निर्माणाधीन मकान में मजदूर पहुंचे तो वहां तेंदुआ दिखाई दिया। तेंदुए के गुर्राने पर वह वहां से दौड़ पड़। मजदूरों के चिल्लाने पर वहां भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई। शोर सुनकर तेंदुआ पास ही इंद्र सिंह पोखरिया के मकान की नाली में जा घुसा। इसके बाद तेंदुआ पास ही खेत में कद्दू और लौकी की बेल में कुछ देर छिपा रहा। इस बीच भीड़ लग गई। कुछ देर बाद ही तेंदुआ हरीश लोहनी के मकान के निर्माणाधीन कमरों तथा कुछ मकानों की छत से होते हुए रमेश धपोला और गिरीश चंद्र शर्मा के मकान की संकरी गली में चला गया।
12.30 बजे वन विभाग के रेंजर प्रमोद तिवारी, पशु चिकित्सक डा. उत्तम कुमार, डा. सुरेंद्र पांगती, केवलानंद पांडे, भूपाल सिंह भाकुनी, हीरा सिंह, हरीश लाल, मोहन राम आदि कर्मचारी और पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। इस दौरान तेंदुआ लोगों की भीड़ देख गुर्राता रहा। वन कर्मियों ने वहां पिंजरा मंगाया। ढाई बजे फॉरेस्टर रवींद्र मेहता ने ट्रेंकुलाइजर गन से तेंदुए को बेहोश किया। दो मकानों के बीच फंसे बेहोश तेंदुए को निकालने के लिए वन कर्मियों ने गिरीश चंद्र शर्मा के मकान की दीवार तोड़ी। वनकर्मी तेंदुए को एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर लाए। पशु चिकित्सकों ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बेहोश तेंदुआ डेढ़ घंटे बाद होश में आया। रेंजर प्रमोद तिवारी बताया कि नर तेंदुए की आयु दो से ढाई वर्ष के बीच है, तेंदुआ दो मीटर लंबा है। इधर, अल्मोड़ा वन प्रभाग के डीएफओ राहुल ने बताया कि शीघ्र ही तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे दुगालखोला में प्रो. देव सिंह पोखरिया के निर्माणाधीन मकान में मजदूर पहुंचे तो वहां तेंदुआ दिखाई दिया। तेंदुए के गुर्राने पर वह वहां से दौड़ पड़। मजदूरों के चिल्लाने पर वहां भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई। शोर सुनकर तेंदुआ पास ही इंद्र सिंह पोखरिया के मकान की नाली में जा घुसा। इसके बाद तेंदुआ पास ही खेत में कद्दू और लौकी की बेल में कुछ देर छिपा रहा। इस बीच भीड़ लग गई। कुछ देर बाद ही तेंदुआ हरीश लोहनी के मकान के निर्माणाधीन कमरों तथा कुछ मकानों की छत से होते हुए रमेश धपोला और गिरीश चंद्र शर्मा के मकान की संकरी गली में चला गया।
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12.30 बजे वन विभाग के रेंजर प्रमोद तिवारी, पशु चिकित्सक डा. उत्तम कुमार, डा. सुरेंद्र पांगती, केवलानंद पांडे, भूपाल सिंह भाकुनी, हीरा सिंह, हरीश लाल, मोहन राम आदि कर्मचारी और पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। इस दौरान तेंदुआ लोगों की भीड़ देख गुर्राता रहा। वन कर्मियों ने वहां पिंजरा मंगाया। ढाई बजे फॉरेस्टर रवींद्र मेहता ने ट्रेंकुलाइजर गन से तेंदुए को बेहोश किया। दो मकानों के बीच फंसे बेहोश तेंदुए को निकालने के लिए वन कर्मियों ने गिरीश चंद्र शर्मा के मकान की दीवार तोड़ी। वनकर्मी तेंदुए को एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर लाए। पशु चिकित्सकों ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया। बेहोश तेंदुआ डेढ़ घंटे बाद होश में आया। रेंजर प्रमोद तिवारी बताया कि नर तेंदुए की आयु दो से ढाई वर्ष के बीच है, तेंदुआ दो मीटर लंबा है। इधर, अल्मोड़ा वन प्रभाग के डीएफओ राहुल ने बताया कि शीघ्र ही तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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