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ति की शहादत के बाद वीरांगना विमला ने बच्चों को पहुंचाया ऊंचे मुकाम तक
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सूचनार्थ....
मदर डे पर .....
वीरांगना विमला ने बच्चों को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया
एक पुत्री सेना में कैप्टन तो दूसरी बन चुकी है एअर हास्टेस
कारगिल के युद्ध में शहीद हुए थे तल्ली मिरई इंद्र सिंह राणा
अमर उजाला ब्यूरो
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। तीन अगस्त 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हुए द्वाराहाट के तल्ली मिरई गांव निवासी इंद्र सिंह राणा की पत्नी ने पति की शहादत के बाद सारा ध्यान बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर लगाया। जिंदगी के सबसे बड़े गम से उबरते हुए विमला ने न केवल बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई, वरन बड़ी पुत्री मीनाक्षी को सेना में कैप्टन के पद पर पहुंचा दिया। वीरांगना विमला की इस मेहनत के क्षेत्रवासी भी कायल हैं।
मालूम हो कि शहीद इंद्र सिंह राणा की शहादत के वक्त वीरांगना विमला के समक्ष दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। एक तरफ पति की शहादत तो दूसरी तरफ तीन छोटे छोटे मासूम बच्चों का चेहरा। विमला ने हिम्मत नहीं हारी और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उच्च मुकाम दिलाने की ठान ली। पिता के शहादत के वक्त बड़ी पुत्री मीनाक्षी दूसरी कक्षा में पढ़ती थी। विमला राणा ने न केवल बच्चों में अच्छे संस्कार भरे, वरन पिता के सपनों को पूरा करने की सीख दी और उन्हें पूरा सहयोग दिया।
बड़ी पुत्री मीनाक्षी राणा ने पिता के कदमों पर चलकर देश सेवा करनेे की ठानी। उन्होंने सीडीएस की परीक्षा पास की, वर्तमान में वह अमृतसर में सेना में कैप्टन पद पर कार्यरत है। वीरांगना विमला की छोटी पुत्री रितिका राणा अंतरराष्ट्रीय इंडिको में एयर हास्टेस है, जबकि एकमात्र पुत्र कुलदीप राणा वर्तमान में एमएससी की पढ़ाई कर रहा है। वीरांगना विमला राणा का कहना है कि पति की शहादत के बाद उनका एकमात्र सपना यही था कि बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें ऊंचे मुकाम तक पहुंचाना। अभी तक पति और बुजुर्गों के आशीर्वाद और बच्चों की मेहनत से सपना पूरा होता दिख रहा है।
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फोटो: 10 आकरेटी 10पी:
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मदर डे पर .....
वीरांगना विमला ने बच्चों को ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया
एक पुत्री सेना में कैप्टन तो दूसरी बन चुकी है एअर हास्टेस
कारगिल के युद्ध में शहीद हुए थे तल्ली मिरई इंद्र सिंह राणा
अमर उजाला ब्यूरो
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। तीन अगस्त 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हुए द्वाराहाट के तल्ली मिरई गांव निवासी इंद्र सिंह राणा की पत्नी ने पति की शहादत के बाद सारा ध्यान बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर लगाया। जिंदगी के सबसे बड़े गम से उबरते हुए विमला ने न केवल बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई, वरन बड़ी पुत्री मीनाक्षी को सेना में कैप्टन के पद पर पहुंचा दिया। वीरांगना विमला की इस मेहनत के क्षेत्रवासी भी कायल हैं।
मालूम हो कि शहीद इंद्र सिंह राणा की शहादत के वक्त वीरांगना विमला के समक्ष दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। एक तरफ पति की शहादत तो दूसरी तरफ तीन छोटे छोटे मासूम बच्चों का चेहरा। विमला ने हिम्मत नहीं हारी और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उच्च मुकाम दिलाने की ठान ली। पिता के शहादत के वक्त बड़ी पुत्री मीनाक्षी दूसरी कक्षा में पढ़ती थी। विमला राणा ने न केवल बच्चों में अच्छे संस्कार भरे, वरन पिता के सपनों को पूरा करने की सीख दी और उन्हें पूरा सहयोग दिया।
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बड़ी पुत्री मीनाक्षी राणा ने पिता के कदमों पर चलकर देश सेवा करनेे की ठानी। उन्होंने सीडीएस की परीक्षा पास की, वर्तमान में वह अमृतसर में सेना में कैप्टन पद पर कार्यरत है। वीरांगना विमला की छोटी पुत्री रितिका राणा अंतरराष्ट्रीय इंडिको में एयर हास्टेस है, जबकि एकमात्र पुत्र कुलदीप राणा वर्तमान में एमएससी की पढ़ाई कर रहा है। वीरांगना विमला राणा का कहना है कि पति की शहादत के बाद उनका एकमात्र सपना यही था कि बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें ऊंचे मुकाम तक पहुंचाना। अभी तक पति और बुजुर्गों के आशीर्वाद और बच्चों की मेहनत से सपना पूरा होता दिख रहा है।
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फोटो: 10 आकरेटी 10पी: