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चारा विकास को चालू वितीय वर्ष में नहीं मिला बजट
Updated Fri, 30 Jun 2017 11:43 PM IST
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अल्मोड़ा। भैंसवाड़ा फार्म में चल रही चारा विकास परियोजना को चालू वित्तीय वर्ष में अब तक बजट नहीं मिला है। इस कारण मार्च से फार्म में काम करने वाले कार्मिक मानदेय से वंचित हैं। साथ ही चारा विकास के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
पर्वतीय क्षेत्र में ग्रामीण इलाकों में अधिकांश लोग पशुपालन से जुड़े हैं। पशुपालकों को वर्षभर पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा नहीं मिल पाता है। सरकार ने 2015-16 में आजीविका परियोजना के सहयोग से भैंसवाड़ा फार्म में सात हेक्टेयर क्षेत्र में चारा विकास परियोजना शुरू की। परियोजना संचालन की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग को सौंपी।
तीन साल की इस परियोजना की कुल लागत 65.62 लाख रुपये है। परियोजना के तहत अब तक पशुपालन विभाग को 30 लाख रुपये मिले हैं, जो कि खर्च भी हो चुके हैं। फार्म में नेपियर, राई, दोलनी, बूम समेत बहुवर्षीय चारा घास के विकास और बीज उत्पादन का कार्य किया जा रहा है।
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विभाग 600 कुंतल नेपियर घास का विक्रय कर चुका है। वहीं राई, दोलनी, बूम प्रजाति की घास के 12 कुंतल बीज का उत्पादन कर चुका है। साथ ही 475 किसानों को बहुवर्षीय चारा घास उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। ताकि ग्रामीण अपने गांव में चारा उत्पादन कर सकें। लेकिन परियोजना के तहत पशुपालन विभाग को मार्च से बजट नहीं मिला है।
इस कारण दैनिक श्रमिक, संविदा श्रमिक, तकनीक सहायक कृषि और नौ पीआरडी जवान मार्च से वेतन से वंचित चल रहे हैं। इधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि बजट के अभाव में फार्म में काम करने वाले कार्मिकों को मानदेय नहीं मिल पाया है। बजट अवमुक्त करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
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पर्वतीय क्षेत्र में ग्रामीण इलाकों में अधिकांश लोग पशुपालन से जुड़े हैं। पशुपालकों को वर्षभर पशुओं के लिए पर्याप्त हरा चारा नहीं मिल पाता है। सरकार ने 2015-16 में आजीविका परियोजना के सहयोग से भैंसवाड़ा फार्म में सात हेक्टेयर क्षेत्र में चारा विकास परियोजना शुरू की। परियोजना संचालन की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग को सौंपी।
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तीन साल की इस परियोजना की कुल लागत 65.62 लाख रुपये है। परियोजना के तहत अब तक पशुपालन विभाग को 30 लाख रुपये मिले हैं, जो कि खर्च भी हो चुके हैं। फार्म में नेपियर, राई, दोलनी, बूम समेत बहुवर्षीय चारा घास के विकास और बीज उत्पादन का कार्य किया जा रहा है।
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विभाग 600 कुंतल नेपियर घास का विक्रय कर चुका है। वहीं राई, दोलनी, बूम प्रजाति की घास के 12 कुंतल बीज का उत्पादन कर चुका है। साथ ही 475 किसानों को बहुवर्षीय चारा घास उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। ताकि ग्रामीण अपने गांव में चारा उत्पादन कर सकें। लेकिन परियोजना के तहत पशुपालन विभाग को मार्च से बजट नहीं मिला है।
इस कारण दैनिक श्रमिक, संविदा श्रमिक, तकनीक सहायक कृषि और नौ पीआरडी जवान मार्च से वेतन से वंचित चल रहे हैं। इधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि बजट के अभाव में फार्म में काम करने वाले कार्मिकों को मानदेय नहीं मिल पाया है। बजट अवमुक्त करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।