गेहूं की फसल में 70 फीसदी गिरावट
तहसील क्षेत्र में बारिश की मार किसानों पर भारी पड़ी है। कई क्षेत्रों में उत्पादन में पचास से सत्तर प्रतिशत तक गिरावट हुई है। इस सबके बावजूद किसानों का हौसला बरकरार है। जमणियां क्षेत्र के किसान इस नुकसान को भुलाकर नई फसल की तैयारी में जुट गए हैं।
तहसील क्षेत्र में बारिश मार से तकरीबन हर किसान प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में गेहूं,चना, मसूर आदि के उत्पादन में पचास से सत्तर प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जो पैदावार हुई भी है उसमें गेहूं आदि अनाज का दाना छोटा और काला पड़ गया है। बसभीड़ा, चांदीखेत, छाना आदि क्षेत्रों में आलू की फसल पहले ही झुलसा रोग की चपेट में आकर बर्बाद हो चुकी है। गेहूं के लिहाज से असिंचित भूमि के बजाए सिंचित भूमि में नुकसान का प्रतिशत ज्यादा है।
लोगों का कहना है कि पहले जंगली सुअरों ने फसल बर्बाद की बाद में बारिश का कहर टूट पड़ा। चौतरफा परेशानियों के बावजूद जमणियां क्षेत्र के किसानों का हौसला बरकरार है। लोग नई फसल की तैयारी में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि बर्बाद फसल के गम में डूबे रहने से कुछ भी हासिल नही होगा। लिहाजा शेष बचे गेहूं की मडाई का काम पूरा होने के बाद धान की फसल के साथ ही मडुवा, सोयाबीन, ज्वार, बाजरा व मक्के की बुआई शुरू की जाएगी।
जमणियां में 187 परिवार करते हैं खेती
जमणियां के ग्राम प्रधान मनोहर सिंह रावत ने बताया कि गांव में कुल 187 परिवार खेती पर निर्भर हैं। सभी परिवार प्रभावित हुए हैं। पटवारी सूची बनाकर ले गए हैं। जल्द ही हल जुताई के बाद धान की बुआई शुरू की जाएगी। बताया कि उत्पादन आधे से भी कम हुआ है। प्रेमसिंह नेगी ने बताया कि पिछले साल उनका एक कुंतल मसूर हुई थी जबकि इस बार मात्र 20 किलोग्राम हुई है। यही हाल गेहूं का भी है। रामसिंह ने बताया कि पिछले वर्ष 3 कुंतल गेहूं हुआ था। इस बार एक कुंतल हुआ है।