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चालाक तेंदुआ नहीं फंस रहा पिंजरे में
Updated Sun, 10 Sep 2017 10:52 PM IST
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। भैंसियाछाना विकासखंड के बमनतिलाड़ी गांव में बृहस्पतिवार की सायं छात्रा को घायल करने वाला तेंदुआ अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। वन विभाग ने गांव में पिंजरा लगा दिया है। चालाक तेंदुआ पिंजरे के समीप तो आ रहा है, लेकिन पिंजरे में कैद नहीं हो रहा। सायं होते ही बमनतिलाड़ी और खासतिलाड़ी गांव के समीप ही तेंदुआ दहाड़ रहा है। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। इधर छात्रा की गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए हल्द्वानी ले जाया गया है।
बृहस्पतिवार को बमनतिलाड़ी गांव में सायं के समय खेत में काम कर रही छात्रा नमिता भट्ट पर तेंदुआ झपट गया। पास ही काम कर रही नमिता की मां जानकी देवी ने तेंदुए पर दरांती से वार किए जिससे तेंदुआ भाग गया था। तेंदुए ने नमिता के पीठ और गर्दन में गहरे घाव कर रखे हैं। उसे उपचार के लिए बेस अस्पताल अल्मोड़ा लाया गया। गहरे घाव होने पर उसे उपचार के लिए हल्द्वानी साईं अस्पातल ले जाया गया है।
इधर वन विभाग ने बमनतिलाड़ी गांव में पिंजरा लगा दिया है और वन कर्मी भी तैनात हैं। तेंदुआ दिन ढलते ही गांव के समीप आकर दहाड़ रहा है। गत रात तो तेंदुआ पिंजरे के निकट भी आया, लेकिन वह पिंजरे में कैद नहीं हो रहा है। वहीं पड़ोसी गांव खासतिलाड़ी के लोगों ने गांव के समीप रविवार सुबह आठ बजे तेंदुए के दहाड़ने की आवाज सुनी। तेंदुए के पकड़ में नहीं आने से ग्रामीण और महिलाएं खेतों में काम करने, जंगल घास लेने के लिए जाने में डर रही हैं। बच्चों को स्कूल पहुंचाने और लाने के लिए अभिभावकों को उनके साथ जाना पड़ रहा है।
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बृहस्पतिवार को बमनतिलाड़ी गांव में सायं के समय खेत में काम कर रही छात्रा नमिता भट्ट पर तेंदुआ झपट गया। पास ही काम कर रही नमिता की मां जानकी देवी ने तेंदुए पर दरांती से वार किए जिससे तेंदुआ भाग गया था। तेंदुए ने नमिता के पीठ और गर्दन में गहरे घाव कर रखे हैं। उसे उपचार के लिए बेस अस्पताल अल्मोड़ा लाया गया। गहरे घाव होने पर उसे उपचार के लिए हल्द्वानी साईं अस्पातल ले जाया गया है।
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इधर वन विभाग ने बमनतिलाड़ी गांव में पिंजरा लगा दिया है और वन कर्मी भी तैनात हैं। तेंदुआ दिन ढलते ही गांव के समीप आकर दहाड़ रहा है। गत रात तो तेंदुआ पिंजरे के निकट भी आया, लेकिन वह पिंजरे में कैद नहीं हो रहा है। वहीं पड़ोसी गांव खासतिलाड़ी के लोगों ने गांव के समीप रविवार सुबह आठ बजे तेंदुए के दहाड़ने की आवाज सुनी। तेंदुए के पकड़ में नहीं आने से ग्रामीण और महिलाएं खेतों में काम करने, जंगल घास लेने के लिए जाने में डर रही हैं। बच्चों को स्कूल पहुंचाने और लाने के लिए अभिभावकों को उनके साथ जाना पड़ रहा है।
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