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ईको सेंसटिव जोन को लेकर जारी अधिसूचना तत्काल निरस्त करने की मांग
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अल्मोड़ा। बिनसर वन्य जीव विहार के निकटवर्ती क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने को लेकर जारी अधिसूचना पर विरोध शुरू हो गया है। प्रधानों और वन पंचायत सरपंच संगठन से जुड़े लोगों का आरोप है कि इसकी जानकारी वन्य जीव विहार प्रबंधन द्वारा स्थानीय लोगों व जन प्रतिनिधियों को नहीं दी गई। न ही ग्रामीणों से आपत्तियां मांगी गई। उन्होंने सचिव पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर जारी अधिसूचना को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
संगठनों का कहना है कि बिनसर वन्य जीव विहार क्षेत्र में कई गांव, स्टेट, वन और कुमाऊं मंडल विकास निगम के विश्रामगृह स्थित हैं। अभयारण्य की स्थापना के बाद पिछले 30 सालों में प्रभावित गांवों में विकास और रोजगार का संकट तेजी से बड़ा है। अभयारण्य के निकटवर्ती क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन बनाए जाने से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ेंगी। कहा कि अभयारण्य बनने के बाद यहां 10 हेक्टेयर से अधिक जमीनों की खरीद फरोख्त हुई है और आलीशान होटल, रिजॉर्ट बनाए गए हैं।
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दूसरी तरफ ग्रामीणों को पानी नहीं दिया जा रहा है। अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र की सीमा के साथ छेड़छाड़ भी की गई है। उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी करने को लेकर ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिया गया। कहा कि अभयारण्य बनने के बाद यहां आग की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी भी हुई है। ज्ञापन भेजने वालों में उत्तराखंड संसाधन वन पंचायत के संयोजक ईश्वर जोशी, मल्ली स्यूनरा विकास मंच के अध्यक्ष चंदन सिंह बिष्ट, वन पंचायत सरपंच संगठन ताकुला के अध्यक्ष डूंगर सिंह भाकुनी, प्रधान संगठन ताकुला के अध्यक्ष सुनील बाराकोटी, प्रधान सुनोली रघुवर दत्त जोशी, भगवत सिंह, महेश जोशी शामिल हैं।
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