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डीएलएड ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजे जाने से प्रशिक्षणार्थी परेशान
Updated Sat, 15 Sep 2018 11:59 PM IST
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अल्मोड़ा। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए डीएलएड करना अनिवार्य कर दिया गया है। कई प्राइवेट शिक्षक इन दिनों विभिन्न केंद्रों में डीएलएड प्रशिक्षण ले रहे हैं, लेकिन नगर क्षेत्र के प्रशिक्षणार्थियों को ट्रेनिंग के लिए ग्रामीण इलाकों में भेजे जाने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण प्रशिक्षणार्थियों के साथ ही संबंधित विद्यालयों के प्रबंधक भी परेशान हैं।
जानकारी के मुताबिक प्रशिक्षणार्थियों से डीएलएड कराने के लिए छह हजार का शुल्क लिया जाता है। बताया गया है कि शिक्षा विभाग ने डीएलएड कराने की जिम्मेदारी किसी संस्था को सौंपी है। प्रशिक्षण के लिए उन्हें 15 दिन चयनित केंद्रों में जाना होता है इसके लिए शनिवार और रविवार के दिन निर्धारित हैं। पूर्व में नगर क्षेत्र के प्रशिक्षणार्थियों को नगर में स्थित केंद्रों में ही बुलाया जाता था, लेकिन इस बार नगर क्षेत्र के कई स्कूलों के प्राइवेट शिक्षकों को लमगड़ा और बाड़ेछीना जाना पड़ रहा है। यही नहीं चौखुटिया के कुछ शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए बाड़ेछीना जाना पड़ रहा है। दूरस्थ केंद्रों में ट्रेनिंग पर जाने के कारण प्राइवेट शिक्षकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इन शिक्षकों को स्थानीय केंद्रों में ही प्रशिक्षण देने का आग्रह किया था।
जानकारी के मुताबिक प्रशिक्षणार्थियों से डीएलएड कराने के लिए छह हजार का शुल्क लिया जाता है। बताया गया है कि शिक्षा विभाग ने डीएलएड कराने की जिम्मेदारी किसी संस्था को सौंपी है। प्रशिक्षण के लिए उन्हें 15 दिन चयनित केंद्रों में जाना होता है इसके लिए शनिवार और रविवार के दिन निर्धारित हैं। पूर्व में नगर क्षेत्र के प्रशिक्षणार्थियों को नगर में स्थित केंद्रों में ही बुलाया जाता था, लेकिन इस बार नगर क्षेत्र के कई स्कूलों के प्राइवेट शिक्षकों को लमगड़ा और बाड़ेछीना जाना पड़ रहा है। यही नहीं चौखुटिया के कुछ शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए बाड़ेछीना जाना पड़ रहा है। दूरस्थ केंद्रों में ट्रेनिंग पर जाने के कारण प्राइवेट शिक्षकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इन शिक्षकों को स्थानीय केंद्रों में ही प्रशिक्षण देने का आग्रह किया था।
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