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पेयजल फिल्टर में मरे मिले 22 बंदर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 25 Jan 2016 10:57 PM IST
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विचला दानपुर क्षेत्र के 101 गांवों के लिए वर्षों पूर्व बनी लीती-रिठकुला पेयजल योजना के स्नो सैंड फिल्टर में 22 बंदर मरे मिले। होहल्ला होने पर बंदरों को बाहर निकाल लिया गया है। ग्रामीणों को इसी योजना से पिछले कई दिनों से पीने के पानी की आपूर्ति हो रही थी। योजना से दूषित पानी की आपूर्ति होने के कारण ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने की आशंका हैै। ग्रामीणों ने पेयजल संस्थान से फिल्टर की सफाई कराने और स्वास्थ्य विभाग से शीघ्र स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार पेयजल संस्थान की लीती-रिठकुला पेयजल योजना का स्नो सैंड फिल्टर लीती के जंगल में बना है। फिल्टर चारों ओर से खुला है। उसकी बेरीकेडिंग भी नहीं की गई है। बांज के जंगल के बीच और ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण वहां तापमान भी काफी कम रहता है। फिल्टर में बंदर कब और कैसे मरे इसकी सही सही जानकारी किसी को भी नहीं है। पूर्व बीडीसी सदस्य और कांग्रेस नेता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि लीती के कुशल सिंह, मोहन सिंह प्रमोद सिंह गायों को चराने के लिए जंगल गए थे। उन्होंने फिल्टर में बंदरों को मरा देखा। उनकी संख्या 22 थी। बंदरों के मरने की खबर क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई। ग्रामीणों की सहायता से बंदरों को फिल्टर से बाहर निकाला गया। उन्होंने बताया कि बंदर कैसे मरे इसकी सही सही जानकारी किसी को भी नहीं है। फिल्टर की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। गंदे पानी की आपूर्ति से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने का खतरा बना है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कैंप लगाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की शीघ्र जांच कराने की मांग की है। उधर पेयजल संस्थान के अधिशाषी अभियंता जेएस खाती ने बताया कि संबंधित जेई ने मौके पर जाकर फिल्टर की सफाई करा दी है। जेई को वहां बंदर मरे हुए नहीं दिखे। उन्होंने बताया स्नो सेंट फिल्टर पहले से ही खुले में ही बना है। फिल्टर की बेरीकेडिंग करवाने के साथ उसकी नियमित सफाई करवाई जाएगी। इधर तहसीलदार एमएस बिरोड़िया ने बताया कि उन्हें फिल्टर में बंदरों के मरने की अभी तक कोई सूचना नहीं है। नायब तहसीदार और क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक को मौके पर भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार पेयजल संस्थान की लीती-रिठकुला पेयजल योजना का स्नो सैंड फिल्टर लीती के जंगल में बना है। फिल्टर चारों ओर से खुला है। उसकी बेरीकेडिंग भी नहीं की गई है। बांज के जंगल के बीच और ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण वहां तापमान भी काफी कम रहता है। फिल्टर में बंदर कब और कैसे मरे इसकी सही सही जानकारी किसी को भी नहीं है। पूर्व बीडीसी सदस्य और कांग्रेस नेता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि लीती के कुशल सिंह, मोहन सिंह प्रमोद सिंह गायों को चराने के लिए जंगल गए थे। उन्होंने फिल्टर में बंदरों को मरा देखा। उनकी संख्या 22 थी। बंदरों के मरने की खबर क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई। ग्रामीणों की सहायता से बंदरों को फिल्टर से बाहर निकाला गया। उन्होंने बताया कि बंदर कैसे मरे इसकी सही सही जानकारी किसी को भी नहीं है। फिल्टर की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। गंदे पानी की आपूर्ति से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने का खतरा बना है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कैंप लगाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की शीघ्र जांच कराने की मांग की है। उधर पेयजल संस्थान के अधिशाषी अभियंता जेएस खाती ने बताया कि संबंधित जेई ने मौके पर जाकर फिल्टर की सफाई करा दी है। जेई को वहां बंदर मरे हुए नहीं दिखे। उन्होंने बताया स्नो सेंट फिल्टर पहले से ही खुले में ही बना है। फिल्टर की बेरीकेडिंग करवाने के साथ उसकी नियमित सफाई करवाई जाएगी। इधर तहसीलदार एमएस बिरोड़िया ने बताया कि उन्हें फिल्टर में बंदरों के मरने की अभी तक कोई सूचना नहीं है। नायब तहसीदार और क्षेत्रीय राजस्व उप निरीक्षक को मौके पर भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा।
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