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कैलाश भू क्षेत्र के संरक्षण को साझा ढंग से काम करेंगे भारत, चीन और नेपाल
Updated Sat, 12 May 2018 12:00 AM IST
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कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। हिमालय क्षेत्र में कैलाश पर्वत के आसपास के करीब 31 हजार वर्ग किमी क्षेत्र के संरक्षण के लिए भारत,चीन और नेपाल द्वारा अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीमोड के तहत चलाई जा रही पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना का पहला चरण समाप्त हो गया है। इसे दूसरे चरण में अगले पांच साल के लिए संचालित करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति हो गई है। इस परियोजना में शामिल तीनों देशों के प्रतिनिधियों की हाल ही में बीजिंग में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। दूसरे चरण के कार्य अक्तूबर-नवंबर से शुरू हो जाएंगे। तय हुआ है कि तीनों देशों द्वारा पहले चरण में किए गए पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और आजीविका आदि से जुड़े जिन कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं, उन्हें कैलाश भू क्षेत्र में अगले पांच सालों में विस्तृत और साझा तरीके से लागू किया जाएगा।
बता दें कि भारत, चीन और नेपाल अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत 2013 से पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत अब तक तीनों देश कैलाश पर्वत के आसपास अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यावरण जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन और लोगों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस परियोजना के लिए तीनों देशों के भू क्षेत्र में कुल 31 हजार वर्ग किमी इलाके को चिन्हित किया गया है। इसमें 14 हजार वर्ग किमी क्षेत्र नेपाल में, 10 हजार वर्ग किमी चीन में और सात हजार वर्ग किमी क्षेत्र भारत में स्थित है। भारत वाला पूरा हिस्सा पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। आईसीमोड परियोजना में भारत की ओर से नोडल एजेंसी जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.आरएस रावल ने बताया कि परियोजना का पांच साल का पहला चरण समाप्त हो चुका है। पहले चरण में तीनों ही देशों ने अपने क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, हेरिटेज टूरिज्म और आजीविका से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन किए हैं। इनमें कई कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। डॉ. रावल ने बताया कि आईसीमोड की 20 अप्रैल को बीजिंग में हुई क्षेत्रीय बैठक में इस परियोजना को दूसरे चरण में पांच के लिए संचालित करने पर सैद्धांतिक सहमति हो चुकी है। तीनों देशों की सरकारों की हरी झंडी की औपचारिकता के बाद परियोजना के दूसरे चरण के कार्य अक्तूबर-नवंबर से शुरू हो जाएंगे। बैठक में तय हुआ कि पहले चरण में अच्छे परिणामों वाले अध्ययनों और कार्यों को तीनों देश परियोजना क्षेत्र में विस्तृत रूप से लागू करेंगे।
दूसरे फेज में अगले पांच साल परियोजना संचालित करने को आईसीमोड की सहमति
अक्तूबर-नवंबर से शुरू होंगे दूसरे चरण के कार्य
इन कार्यों को साझा करेंगे तीनों देश
अल्मोड़ा। पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत भारत, नेपाल और चीन द्वारा पहले चरण में किए गए जिन कार्यों और अध्ययनों में अच्छे परिणाम सामने आए हैं उन्हें दूसरे चरण में तीनों देश साझा करके परियोजना को विस्तार देंगे। मसलन नौले, धारे और जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए भारतीय क्षेत्र में अच्छा कार्य किया गया है। इसे दूसरे चरण में नेपाल और चीन भी अपने यहां इसे लागू करेंगे। इसी तरह कूड़ा निस्तारण पर चीन ने अच्छा कार्य किया है। जबकि परियोजना के तहत नेपाल में बिच्छू जैसी लगने वाली आलो घास के रेशों से शानदार किस्म के कपड़े, बैग आदि बनाकर आजीविका विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया गया है। दूसरे चरण में इन सभी कार्यों को तीनों देश अपने-अपने यहां अपनाएंगे।
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बता दें कि भारत, चीन और नेपाल अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत 2013 से पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत अब तक तीनों देश कैलाश पर्वत के आसपास अपने-अपने क्षेत्रों में पर्यावरण जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन और लोगों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस परियोजना के लिए तीनों देशों के भू क्षेत्र में कुल 31 हजार वर्ग किमी इलाके को चिन्हित किया गया है। इसमें 14 हजार वर्ग किमी क्षेत्र नेपाल में, 10 हजार वर्ग किमी चीन में और सात हजार वर्ग किमी क्षेत्र भारत में स्थित है। भारत वाला पूरा हिस्सा पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। आईसीमोड परियोजना में भारत की ओर से नोडल एजेंसी जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.आरएस रावल ने बताया कि परियोजना का पांच साल का पहला चरण समाप्त हो चुका है। पहले चरण में तीनों ही देशों ने अपने क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, हेरिटेज टूरिज्म और आजीविका से जुड़े विभिन्न तरह के अध्ययन किए हैं। इनमें कई कार्यों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। डॉ. रावल ने बताया कि आईसीमोड की 20 अप्रैल को बीजिंग में हुई क्षेत्रीय बैठक में इस परियोजना को दूसरे चरण में पांच के लिए संचालित करने पर सैद्धांतिक सहमति हो चुकी है। तीनों देशों की सरकारों की हरी झंडी की औपचारिकता के बाद परियोजना के दूसरे चरण के कार्य अक्तूबर-नवंबर से शुरू हो जाएंगे। बैठक में तय हुआ कि पहले चरण में अच्छे परिणामों वाले अध्ययनों और कार्यों को तीनों देश परियोजना क्षेत्र में विस्तृत रूप से लागू करेंगे।
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दूसरे फेज में अगले पांच साल परियोजना संचालित करने को आईसीमोड की सहमति
अक्तूबर-नवंबर से शुरू होंगे दूसरे चरण के कार्य
इन कार्यों को साझा करेंगे तीनों देश
अल्मोड़ा। पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत भारत, नेपाल और चीन द्वारा पहले चरण में किए गए जिन कार्यों और अध्ययनों में अच्छे परिणाम सामने आए हैं उन्हें दूसरे चरण में तीनों देश साझा करके परियोजना को विस्तार देंगे। मसलन नौले, धारे और जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए भारतीय क्षेत्र में अच्छा कार्य किया गया है। इसे दूसरे चरण में नेपाल और चीन भी अपने यहां इसे लागू करेंगे। इसी तरह कूड़ा निस्तारण पर चीन ने अच्छा कार्य किया है। जबकि परियोजना के तहत नेपाल में बिच्छू जैसी लगने वाली आलो घास के रेशों से शानदार किस्म के कपड़े, बैग आदि बनाकर आजीविका विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया गया है। दूसरे चरण में इन सभी कार्यों को तीनों देश अपने-अपने यहां अपनाएंगे।
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