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जिला विकास प्राधिकरण पहाड़ को उजाड़ने की साजिश का हिस्सा है
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अल्मोड़ा। सर्वदलीय संघर्ष समिति से जुड़े सदस्यों की बसौली तथा ताकुला में हुई बैठक में जिला विकास प्राधिकरण को जन विरोधी तथा पर्वतीय क्षेत्र के लिए पूर्णतया अव्यवहारिक करार देते हुए उसका विरोध करने का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार का यह कदम 73 वां, 74 वां संविधान संशोधन की मूल अवधारणा के खिलाफ है। यह जिला विकास प्राधिकरण पहाड़ को उजाड़ने की साजिश का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि आज पहाड़ की जनता अपना अस्तित्व बचाने के लिए तमाम परेशानियों से जूझ रही है। उनके परंपरागत वनाधिकार समाप्त कर दिये गये हैं। इमारती लकड़ी, पत्थर, पठाल जैसे निर्माण सामग्री पर प्रतिबंध लगने से पहले ही भवन निर्माण जटिल बना दिया। ऐसे में अब प्राधिकरण ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ाएगा। क्षेत्र की जनता पहले ही बिनसर वन्य जीव विहार से परेशान है। जटिल वन कानूनों तथा जंगली जानवरों के भय से ग्रामीण सड़कों के निकट बसने को मजबूर हुए है।
अब एक तरफ अभयारण्य की सीमा से दस किमी. क्षेत्र को इको सेंसटिव जोन बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यहां प्राधिकरण लागू किया जा रहा है। भवन निर्माण हेतु न्यूनतम भूखंड की सीमा निर्धारित करने से छोटे गरीब उद्यमी के समक्ष आजीविका का संकट बढे़गा और इससे पलायन भी बढ़ेगा। तय किया गया कि 25 फरवरी को प्राधिकरण के विरोध में अल्मोड़ा में होने वाले प्रदर्शन में क्षेत्र की जनता भी हिस्सा लेगी।
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बैठक में वन पंचायत सरपंच संगठन के अध्यक्ष डूंगर सिंह, उत्तराखंड संसाधन पंचायत के संयोजक ईश्वर जोशी, ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुनील बाराकोटी, मल्ला स्यूनरा विकास मंच के अध्यक्ष चंदन सिंह बिष्ट, व्यापार मंडल ताकुला के अध्यक्ष जगदीश सुयाल, सर्वदलीय संघर्ष समिति के चंद्रमणि भट्ट, पूरन चंद्र तिवारी, यूसूफ तिवारी, प्रताप सिंह सत्याल, डी.के.कांडपाल, लक्ष्मण सिंह ऐठानी, ग्राम प्रधान रघुवर जोशी, बिशन बाराकोटी, मुकेश जोशी आदि मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि आज पहाड़ की जनता अपना अस्तित्व बचाने के लिए तमाम परेशानियों से जूझ रही है। उनके परंपरागत वनाधिकार समाप्त कर दिये गये हैं। इमारती लकड़ी, पत्थर, पठाल जैसे निर्माण सामग्री पर प्रतिबंध लगने से पहले ही भवन निर्माण जटिल बना दिया। ऐसे में अब प्राधिकरण ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ाएगा। क्षेत्र की जनता पहले ही बिनसर वन्य जीव विहार से परेशान है। जटिल वन कानूनों तथा जंगली जानवरों के भय से ग्रामीण सड़कों के निकट बसने को मजबूर हुए है।
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अब एक तरफ अभयारण्य की सीमा से दस किमी. क्षेत्र को इको सेंसटिव जोन बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यहां प्राधिकरण लागू किया जा रहा है। भवन निर्माण हेतु न्यूनतम भूखंड की सीमा निर्धारित करने से छोटे गरीब उद्यमी के समक्ष आजीविका का संकट बढे़गा और इससे पलायन भी बढ़ेगा। तय किया गया कि 25 फरवरी को प्राधिकरण के विरोध में अल्मोड़ा में होने वाले प्रदर्शन में क्षेत्र की जनता भी हिस्सा लेगी।
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बैठक में वन पंचायत सरपंच संगठन के अध्यक्ष डूंगर सिंह, उत्तराखंड संसाधन पंचायत के संयोजक ईश्वर जोशी, ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुनील बाराकोटी, मल्ला स्यूनरा विकास मंच के अध्यक्ष चंदन सिंह बिष्ट, व्यापार मंडल ताकुला के अध्यक्ष जगदीश सुयाल, सर्वदलीय संघर्ष समिति के चंद्रमणि भट्ट, पूरन चंद्र तिवारी, यूसूफ तिवारी, प्रताप सिंह सत्याल, डी.के.कांडपाल, लक्ष्मण सिंह ऐठानी, ग्राम प्रधान रघुवर जोशी, बिशन बाराकोटी, मुकेश जोशी आदि मौजूद थे।