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जंगली जानवरों से खेती को बचाने की योजना अधर में
Updated Fri, 19 Jan 2018 11:17 PM IST
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अल्मोड़ा। ग्रामीण इलाकों में सुअर आदि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। दो साल पूर्व तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसके लिए कृषि भूमि की हदबंदी (दीवार बनाने) करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अल्मोड़ा वन प्रभाग, सिविल सोयम वन प्रभाग द्वारा शासन को भेजे गए 70 लाख के प्रस्ताव पर मात्र आठ लाख रुपये ही अवमुक्त हुए हैं।
जिले के ग्रामीण इलाकों में खेती ही किसानों की आय का प्रमुख जरिया है। जंगली जानवरों द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाने से किसान परेशान हैं। जंगली सुअर, सेही, बंदर आदि जानवर आबादी क्षेत्रों को आ रहे हैं। खेतों में बोई कई फसल को चौपट कर जाते हैं। यह समस्या करीब तीन दशक से बनी है। इस कारण किसानों को बोए गए बीज का मूल्य भी नहीं मिल पाता है। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों ने जंगली जानवरों के भय से सीमित क्षेत्र में खेती करनी शुरू कर दी है। यह ग्रामीण इलाकों से पलायन का भी एक मुख्य कारण है। कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वर्ष 2016 में ग्रामीण इलाकों में खेती को बचाने के लिए कृषि भूमि की हदबंदी (दीवार बनाने) की घोषणा की थी। इसके बाद वन विभाग ने जंगली जानवरों से खेती को बचाने के लिए गांवों में कृषि भूमि की दीवार बंदी (हदबंदी) करने को प्रस्ताव सरकार को भेजे। अल्मोड़ा वन प्रभाग 50 लाख, सिविल सोयम वन प्रभाग ने 20 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसमें से दोनों प्रभागों को क्रमश: पांच लाख, तीन लाख रुपये ही मिले हैं, जो कि नाकाफी है।
70 लाख के प्रस्ताव पर वन विभाग को मात्र आठ लाख मिले
ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों से खेती कैसे बचेगी?
शासन से अवमुक्त राशि से जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार बंदी का काम शुरू किया जाएगा। शेष बजट अवमुक्त करने के लिए शासन से मांग की जाएगी।
- पंकज कुमार, डीएफओ, अल्मोड़ा वन प्रभाग।
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जिले के ग्रामीण इलाकों में खेती ही किसानों की आय का प्रमुख जरिया है। जंगली जानवरों द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाने से किसान परेशान हैं। जंगली सुअर, सेही, बंदर आदि जानवर आबादी क्षेत्रों को आ रहे हैं। खेतों में बोई कई फसल को चौपट कर जाते हैं। यह समस्या करीब तीन दशक से बनी है। इस कारण किसानों को बोए गए बीज का मूल्य भी नहीं मिल पाता है। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों ने जंगली जानवरों के भय से सीमित क्षेत्र में खेती करनी शुरू कर दी है। यह ग्रामीण इलाकों से पलायन का भी एक मुख्य कारण है। कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वर्ष 2016 में ग्रामीण इलाकों में खेती को बचाने के लिए कृषि भूमि की हदबंदी (दीवार बनाने) की घोषणा की थी। इसके बाद वन विभाग ने जंगली जानवरों से खेती को बचाने के लिए गांवों में कृषि भूमि की दीवार बंदी (हदबंदी) करने को प्रस्ताव सरकार को भेजे। अल्मोड़ा वन प्रभाग 50 लाख, सिविल सोयम वन प्रभाग ने 20 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसमें से दोनों प्रभागों को क्रमश: पांच लाख, तीन लाख रुपये ही मिले हैं, जो कि नाकाफी है।
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70 लाख के प्रस्ताव पर वन विभाग को मात्र आठ लाख मिले
ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों से खेती कैसे बचेगी?
शासन से अवमुक्त राशि से जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार बंदी का काम शुरू किया जाएगा। शेष बजट अवमुक्त करने के लिए शासन से मांग की जाएगी।
- पंकज कुमार, डीएफओ, अल्मोड़ा वन प्रभाग।