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अब विश्व बैंक की मदद से भी विकसित होंगे चाय बागान
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अल्मोड़ा। विश्व बैंक की मदद से भी अब प्रदेश में चाय बागान विकसित किए जाएंगे। सरकार ने नैनीताल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तीन साल में 150 हेक्टेयर में चाय की पौध रोपित करने के तीन करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। प्रदेश सरकार ने यह प्रस्ताव विश्व बैंक को भेजा है।
विश्व बैंक की मदद से तीन सालों में बोर्ड प्रदेश के नैनीताल जिले में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की पौध रोपित करेगा। प्रतिवर्ष 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान विकसित किए जाएंगे। यह बागान धारी, रामगढ़ और बेतालघाट क्षेत्र में लगेंगे। बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार ने तीन करोड़ का प्रस्ताव पास कर विश्व बैंक को भेज दिया है। विश्व बैंक से पैसा मिलने के बाद इनमें काम शुरू किया जाएगा।
इधर उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की वर्तमान में प्रदेश में घोड़ाखाल (नैनीताल), हरिनगरी (बागेश्वर), चंपावत और भटोली (चमोली) में चाय फैक्ट्रियां स्थापित हैं। इन घोड़ाखाल की चाय फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 10 हजार, हरिनगरी की 50 हजार, चंपावत और भटोेली की 15-15 हजार किलो प्रतिवर्ष है। कौसानी में एक निजी चाय फैक्ट्री पिछले दो साल से बंद पड़ी है। इस फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 75 हजार किलो की थी। चाय विकास बोर्ड ने फैक्ट्री को चालू करने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद बोर्ड इस फैक्ट्री को चालू करेगा।
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चालू वित्तीय वर्ष में हुआ 73 हजार किलो चाय उत्पादन
अल्मोड़ा। चाय विकास बोर्ड प्रदेश में 1250 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान लगा चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 73 हजार किलो चाय का उत्पादन हुआ। इसमें से 52 हजार किलो चाय का विक्रय भी किया जा चुका है। जिससे बोर्ड को 1.65 करोड़ की आय भी हुई है। ब्यूरो
विश्व बैंक की मदद से तीन सालों में बोर्ड प्रदेश के नैनीताल जिले में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की पौध रोपित करेगा। प्रतिवर्ष 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान विकसित किए जाएंगे। यह बागान धारी, रामगढ़ और बेतालघाट क्षेत्र में लगेंगे। बोर्ड के वित्त अधिकारी अनिल खोलिया ने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार ने तीन करोड़ का प्रस्ताव पास कर विश्व बैंक को भेज दिया है। विश्व बैंक से पैसा मिलने के बाद इनमें काम शुरू किया जाएगा।
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इधर उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की वर्तमान में प्रदेश में घोड़ाखाल (नैनीताल), हरिनगरी (बागेश्वर), चंपावत और भटोली (चमोली) में चाय फैक्ट्रियां स्थापित हैं। इन घोड़ाखाल की चाय फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 10 हजार, हरिनगरी की 50 हजार, चंपावत और भटोेली की 15-15 हजार किलो प्रतिवर्ष है। कौसानी में एक निजी चाय फैक्ट्री पिछले दो साल से बंद पड़ी है। इस फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 75 हजार किलो की थी। चाय विकास बोर्ड ने फैक्ट्री को चालू करने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद बोर्ड इस फैक्ट्री को चालू करेगा।
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चालू वित्तीय वर्ष में हुआ 73 हजार किलो चाय उत्पादन
अल्मोड़ा। चाय विकास बोर्ड प्रदेश में 1250 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय बागान लगा चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 73 हजार किलो चाय का उत्पादन हुआ। इसमें से 52 हजार किलो चाय का विक्रय भी किया जा चुका है। जिससे बोर्ड को 1.65 करोड़ की आय भी हुई है। ब्यूरो