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भोजन माताओं को तीन माह से नहीं मिला मानदेय
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अल्मोड़ा। जिले में सरकारी विद्यालयों में कार्यरत भोजन माताओं को पिछले तीन माह से मानेदय नहीं मिला है। वहीं बोनस का भुगतान भी नहीं हुआ है। इस कारण उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
सरकार द्वारा राजकीय प्राथमिक विद्यालयों, जूनियर हाईस्कूलों और राजकीय इंटर कॉलेजों में कक्षा एक से आठ तक अध्ययन बच्चों को निशुल्क मध्याह्न भोजन दिया जाता है।
प्रत्येक विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भोजन माताएं तैनात हैं। भोजन माताएं अल्प मानदेय भोगी हैं। सरकार उन्हें प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय देती है। वह भी उन्हें समय पर नहीं मिल पा रहा है। वहीं एक हजार रुपये का बोनस भी भोजन माताओं को अब तक नहीं मिला है।
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समय पर मानदेय नहीं मिलने पर भोजन माताओं को भी अप्रैल में अपने बच्चों के प्रवेश के अलावा कापी, किताबें, ड्रेस आदि खरीदने में आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा है। भोजन माताओं ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से जल्द वेतन भुगतान की मांग उठाई है।
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सरकार द्वारा राजकीय प्राथमिक विद्यालयों, जूनियर हाईस्कूलों और राजकीय इंटर कॉलेजों में कक्षा एक से आठ तक अध्ययन बच्चों को निशुल्क मध्याह्न भोजन दिया जाता है।
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प्रत्येक विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भोजन माताएं तैनात हैं। भोजन माताएं अल्प मानदेय भोगी हैं। सरकार उन्हें प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय देती है। वह भी उन्हें समय पर नहीं मिल पा रहा है। वहीं एक हजार रुपये का बोनस भी भोजन माताओं को अब तक नहीं मिला है।
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समय पर मानदेय नहीं मिलने पर भोजन माताओं को भी अप्रैल में अपने बच्चों के प्रवेश के अलावा कापी, किताबें, ड्रेस आदि खरीदने में आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा है। भोजन माताओं ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से जल्द वेतन भुगतान की मांग उठाई है।