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‘लूट का साधन बन गईं मनरेगा की योजनाएं’
Updated Sat, 07 Apr 2018 10:50 PM IST
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अल्मोड़ा। भैंसियाछाना ब्लॉक के ग्राम पंचायत पल्यूं में शुक्रवार को हुई ग्रामीणों की खुली बैठक में गांव में विकास कार्यों को लेकर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत गांव में बन रही सड़क का आरटीआई में विवरण मांगने के बाद गांव में मनरेगा के तहत चल रहे सभी निर्माण कार्य बंद करा दिए गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मनरेगा की योजनाओं को लूट का साधन बनाया जा रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका को भी संदिग्ध बताते हुए शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
नाराज ग्रामवासियों और महिला संगठनों ने आरोप लगाया कि गांव के पंचायत घर में निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। निर्माणाधीन एक किमी की सीसी सड़क का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इसके अलावा कई योजनाओं के निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। जबकि कागजों में इसे पूरा दिखाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजनाओं के लिए मंजूर धन की बंदरबांट की जा रही है। मनरेगा के कार्य बंद करने से गांव के श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं और उन्हें काम की तलाश में दर-दर भटकना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्राइमरी स्कूल में बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं होने पर भी आक्रोश जताया। इस दौरान मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी तैयार किया गया। तय हुआ कि जल्द ही जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। इधर गांव के श्रमिकों ने जिलाधिकारी से गांव के अपूर्ण कार्य शुरू करने तक उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की मांग की है।
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बैठक को पूर्व ग्राम प्रधान गोपाल दत्त भट्ट, महिला संगठन अध्यक्ष जीवंती, उपाध्यक्ष शोभा देवी, पूर्व कानूनगो विपिन जोशी, आदित्य पांडे, गोपाल सिंह, आरसी पांडे, रमेश राम ने संबोधित किया। इस मौके पर विपिन मिश्रा, लीला राम, चंदन राम, कलावती, कैलाश चंद्र, योगेश पंत, नवीन चंद, चंदन लाल, जगदीश राम समेत महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं मौजूद थीं।
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नाराज ग्रामवासियों और महिला संगठनों ने आरोप लगाया कि गांव के पंचायत घर में निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। निर्माणाधीन एक किमी की सीसी सड़क का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इसके अलावा कई योजनाओं के निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। जबकि कागजों में इसे पूरा दिखाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजनाओं के लिए मंजूर धन की बंदरबांट की जा रही है। मनरेगा के कार्य बंद करने से गांव के श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं और उन्हें काम की तलाश में दर-दर भटकना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने प्राइमरी स्कूल में बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं होने पर भी आक्रोश जताया। इस दौरान मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी तैयार किया गया। तय हुआ कि जल्द ही जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। इधर गांव के श्रमिकों ने जिलाधिकारी से गांव के अपूर्ण कार्य शुरू करने तक उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की मांग की है।
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बैठक को पूर्व ग्राम प्रधान गोपाल दत्त भट्ट, महिला संगठन अध्यक्ष जीवंती, उपाध्यक्ष शोभा देवी, पूर्व कानूनगो विपिन जोशी, आदित्य पांडे, गोपाल सिंह, आरसी पांडे, रमेश राम ने संबोधित किया। इस मौके पर विपिन मिश्रा, लीला राम, चंदन राम, कलावती, कैलाश चंद्र, योगेश पंत, नवीन चंद, चंदन लाल, जगदीश राम समेत महिला समूहों से जुड़ी महिलाएं मौजूद थीं।