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वाहनों में अब स्पीड गवर्नर लगने पर ही मिलेगा फिटनेस प्रमाणपत्र
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:53 PM IST
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अल्मोड़ा। राज्य सरकार से अधिसूचना जारी होने के बाद सभी कॉमर्शियल टैक्सी, रोडवेज और केमू की यात्री बसें, स्कूल वाहन, ट्रक आदि समेत सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत इस संबंध में करीब एक माह पहले प्रदेश सरकार ने स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कंपनियां भी तय कर दी हैं। जनवरी 2018 से नए वाहनों में स्पीड गवर्नर कंपनियों से ही लग कर आ रहे हैं।
जनवरी 2018 से पूर्व में बने सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का काम शुरू हो गया है। आदेश के मुताबिक जिन वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगा मिलेगा उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। स्पीड गवर्नर लगने के बाद ही इन वाहनों को आगे फिटनेस प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
दरअसल देश में बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट 1989 के नियम 118 के तहत एक आदेश जारी करके एक अप्रैल 2016 तक सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन इसके लिए हर राज्यों को अलग से अधिसूचना जारी करनी थी। एआरटीओ आलोक कुमार जोशी ने बताया कि उत्तराखंड में जनवरी 2018 से बनकर आ रहे सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर कंपनी से ही लगकर आ रहे हैं, लेकिन जनवरी 2018 से पहले बने सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर अलग से फिट किए जाने हैं।
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उत्तराखंड में स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कंपनियों का चयन नहीं होने के कारण इस काम में विलंब हुआ। कुछ समय पहले राज्य में इसके लिए नौ कंपनियों को मान्यता दी गई है। इसके बाद प्रदेश सरकार ने ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की अनिवार्यता को भी लागू कर दिया है।
एआरटीओ जोशी ने बताया कि जनवरी 2018 से पूर्व बने सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाया जाना अनिवार्य है। वाहन स्वामियों को फिलहाल कुछ समय दिया जा रहा है, लेकिन कुछ अवधि के बाद जिन ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं पाए जाएंगे, उन वाहनों के धारा 56,83 और 184 के अंतर्गत चालान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल वाहनों को अस्थायी फिटनेस प्रमाणपत्र ही दिए जा रहे हैं और 15 दिन के भीतर स्पीड गवर्नर लगाने के बाद ही उन्हें स्थायी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
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जनवरी 2018 से पूर्व में बने सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का काम शुरू हो गया है। आदेश के मुताबिक जिन वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगा मिलेगा उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। स्पीड गवर्नर लगने के बाद ही इन वाहनों को आगे फिटनेस प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
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दरअसल देश में बढ़ती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट 1989 के नियम 118 के तहत एक आदेश जारी करके एक अप्रैल 2016 तक सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन इसके लिए हर राज्यों को अलग से अधिसूचना जारी करनी थी। एआरटीओ आलोक कुमार जोशी ने बताया कि उत्तराखंड में जनवरी 2018 से बनकर आ रहे सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर कंपनी से ही लगकर आ रहे हैं, लेकिन जनवरी 2018 से पहले बने सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर अलग से फिट किए जाने हैं।
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उत्तराखंड में स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कंपनियों का चयन नहीं होने के कारण इस काम में विलंब हुआ। कुछ समय पहले राज्य में इसके लिए नौ कंपनियों को मान्यता दी गई है। इसके बाद प्रदेश सरकार ने ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की अनिवार्यता को भी लागू कर दिया है।
एआरटीओ जोशी ने बताया कि जनवरी 2018 से पूर्व बने सभी ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाया जाना अनिवार्य है। वाहन स्वामियों को फिलहाल कुछ समय दिया जा रहा है, लेकिन कुछ अवधि के बाद जिन ट्रांसपोर्ट वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं पाए जाएंगे, उन वाहनों के धारा 56,83 और 184 के अंतर्गत चालान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल वाहनों को अस्थायी फिटनेस प्रमाणपत्र ही दिए जा रहे हैं और 15 दिन के भीतर स्पीड गवर्नर लगाने के बाद ही उन्हें स्थायी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।