{"_id":"59aadac04f1c1bec278b4f00","slug":"161504369344-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अबकी डबल इंजन की सरकार से है शरदोत्सव की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अबकी डबल इंजन की सरकार से है शरदोत्सव की उम्मीद
Updated Sat, 02 Sep 2017 09:52 PM IST
विज्ञापन
अल्मोड़ा। पर्वतीय जिलों में लोगों के मनोरंजन के लिए मेले, तीज, त्योहारों के अलावा ऐसा कुछ भी नहीं है कि लोग उत्सवों का जमकर आनंद उठा सकें। राज्य बनने के बाद अल्मोड़ा में 2012 तक तीन बार ही शरदोत्सव का आयोजन हुआ है। उसमें भी 2012 में हुए शरदोत्सव में समिति के पास लाखों की देनदारी है। लोगों का कहना है कि अब तो केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है यानी कि डबल इंजन की सरकार से लोगों में इस बार शरदोत्सव की उम्मीद जगी है।
राज्य बनने के बाद पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. विजय जोशी के समय नगर में दो बार भव्य शरदोत्सव का आयोजन हुआ था। उसके बाद पूर्व पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी के कार्यकाल में 2012 में शरदोत्सव का आयोजन किया गया, लेकिन तब से पांच साल गुजर गए अल्मोड़ा में शरदोत्सव का आयोजन नहीं हो सका है।
पालिका का कहना है कि पिछले शरदोत्सव में ही पालिका की लाखों की देनदारी बची हुई है, जबकि एक शरदोत्सव के आयोजन में करीब 30 से 35 लाख रुपए खर्च हो जाते हैं। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के समय कुमाऊं महोत्सव का आयोजन किया जाता था। पिछले दिनों अल्मोड़ा पहुंचे पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के सामने शरदोत्सव का आयोजन कराने संबंधी मुद्दा उठा भी था। अल्मोड़ा में शरदोत्सव का आयोजन कराने के लिए पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने पर्यटन मंत्री से 40 लाख रुपये की मांग की थी और मंत्री जी ने इस पर विचार करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने बताया कि पिछले शरदोत्सव का ही करीब ढाई से तीन लाख रुपये बकाया है और पालिका के पास वर्तमान में पैसे की काफी कमी है और अपने स्तर से वह इतना बड़ा आयोजन नहीं करा सकती है। लोगों का कहना है कि सांस्कृतिक नगरी होने के बावजूद यहां इस तरह के आयोजनों का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिर भी लोगों में आस जगी है कि इस बार उत्तराखंड सरकार अल्मोड़ा में शरदोत्सव कराने के लिए हामी भरेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य बनने के बाद पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. विजय जोशी के समय नगर में दो बार भव्य शरदोत्सव का आयोजन हुआ था। उसके बाद पूर्व पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी के कार्यकाल में 2012 में शरदोत्सव का आयोजन किया गया, लेकिन तब से पांच साल गुजर गए अल्मोड़ा में शरदोत्सव का आयोजन नहीं हो सका है।
विज्ञापन
पालिका का कहना है कि पिछले शरदोत्सव में ही पालिका की लाखों की देनदारी बची हुई है, जबकि एक शरदोत्सव के आयोजन में करीब 30 से 35 लाख रुपए खर्च हो जाते हैं। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के समय कुमाऊं महोत्सव का आयोजन किया जाता था। पिछले दिनों अल्मोड़ा पहुंचे पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के सामने शरदोत्सव का आयोजन कराने संबंधी मुद्दा उठा भी था। अल्मोड़ा में शरदोत्सव का आयोजन कराने के लिए पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने पर्यटन मंत्री से 40 लाख रुपये की मांग की थी और मंत्री जी ने इस पर विचार करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने बताया कि पिछले शरदोत्सव का ही करीब ढाई से तीन लाख रुपये बकाया है और पालिका के पास वर्तमान में पैसे की काफी कमी है और अपने स्तर से वह इतना बड़ा आयोजन नहीं करा सकती है। लोगों का कहना है कि सांस्कृतिक नगरी होने के बावजूद यहां इस तरह के आयोजनों का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिर भी लोगों में आस जगी है कि इस बार उत्तराखंड सरकार अल्मोड़ा में शरदोत्सव कराने के लिए हामी भरेगी।
विज्ञापन