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मानसून को लेकर जिले में तैयारियां
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अल्मोड़ा। बारिश शुरू हो चुकी है और जिले में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए सरकारी मशीनरी भी पूरी तरह तैयार है। पर्याप्त खाद्यान्न से लेकर सड़क मार्ग खोलने के लिए 64 जेसीबी तैनात हैं। सभी तहसीलों में एक एक सेटेलाइट फोन भी उपलब्ध है।
अभी तक सेटेलाइट फोन का प्रयोग केवल एक बार दो जून को चौखुटिया के खीड़ा में बादल फटने के दौरान किया गया था। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि सेटेलाइट फोन की वजह से आपदा की स्थिति और आपदा के दौरान घायल हुए लोगों को रेसक्यू करने में काफी मदद मिल रही है, लेकिन इसका प्रयोग खुले आसमान के नीचे ही हो सकता है।
जिले को दस सेटेलाइट फोन पूर्व में मिल चुके थे। वहीं जून में पांच और सेटेलाइट फोन आपदा प्रबंधन विभाग के पास आ गए थे। जिसके बाद सभी तहसीलों में एक-एक सेटेलाइट फोन उपलब्ध करा दिए गए। सेटेलाइट फोन का बेहतर उपयोग आपदा के दौरान पहाड़ी वाली स्थानों जहां पर नेटवर्क की उपलब्धता शून्य हो, किया जाता है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि सेटेलाइट का प्रयोग केवल खुले आसमान के नीचे हो सकता है। घर के अंदर, छतरी के नीचे या किसी भी प्रकार का अवरोध आने पर सेटेलाइट फोन सिग्नल नहीं पकड़ पाता।
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सेटेलाइट फोन में नंबर डायल करने से पहले आइएसडी कोड लगाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में संचार की 24 सेटेलाइट में से तीन सेटेलाइट का सिग्नल सेटेलाइट फोन में आना चाहिए तभी फोन काम कर सकता है। इस बार अभी तक दो जून को खीड़ा में बादल फटने के दौरान ही सेटेलाइट फोन का प्रयोग किया गया। उन्होंने बताया कि सेटेलाइट फोन का किस तरह उपयोग करना है इसके लिए कर्मियों को पूर्व में प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
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अभी तक सेटेलाइट फोन का प्रयोग केवल एक बार दो जून को चौखुटिया के खीड़ा में बादल फटने के दौरान किया गया था। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि सेटेलाइट फोन की वजह से आपदा की स्थिति और आपदा के दौरान घायल हुए लोगों को रेसक्यू करने में काफी मदद मिल रही है, लेकिन इसका प्रयोग खुले आसमान के नीचे ही हो सकता है।
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जिले को दस सेटेलाइट फोन पूर्व में मिल चुके थे। वहीं जून में पांच और सेटेलाइट फोन आपदा प्रबंधन विभाग के पास आ गए थे। जिसके बाद सभी तहसीलों में एक-एक सेटेलाइट फोन उपलब्ध करा दिए गए। सेटेलाइट फोन का बेहतर उपयोग आपदा के दौरान पहाड़ी वाली स्थानों जहां पर नेटवर्क की उपलब्धता शून्य हो, किया जाता है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि सेटेलाइट का प्रयोग केवल खुले आसमान के नीचे हो सकता है। घर के अंदर, छतरी के नीचे या किसी भी प्रकार का अवरोध आने पर सेटेलाइट फोन सिग्नल नहीं पकड़ पाता।
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सेटेलाइट फोन में नंबर डायल करने से पहले आइएसडी कोड लगाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में संचार की 24 सेटेलाइट में से तीन सेटेलाइट का सिग्नल सेटेलाइट फोन में आना चाहिए तभी फोन काम कर सकता है। इस बार अभी तक दो जून को खीड़ा में बादल फटने के दौरान ही सेटेलाइट फोन का प्रयोग किया गया। उन्होंने बताया कि सेटेलाइट फोन का किस तरह उपयोग करना है इसके लिए कर्मियों को पूर्व में प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।