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रात में ठिठुर रहे हैं मजदूर
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अल्मोड़ा। जिले में निर्माणाधीन सरकारी भवनों और इमारतों में काम करने वाले मजदूरों को आवास नहीं होने के कारण रात निर्माणाधीन भवनों में ही गुजारनी पड़ती है। आश्रय नहीं मिलने के कारण कई बार इन मजदूरों को खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है। इन मजदूरों के लिए जिले में कहीं भी शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है।
जिले में 13 हजार से अधिक मजदूर पंजीकृत हैं। ज्यादातर मजदूरों के पास रहने का कोई ठौर ठिकाना नहीं है। जिले के विभिन्न स्थानों में सरकारी, अर्द्धसरकारी और प्राइवेट भवनों के निर्माण कार्य में जुटे इन मजदूरों को अक्सर उन्हीं निर्माणाधीन भवनों के पास रात गुजारनी पड़ती है। कहीं भी शेल्टर होम नहीं होने के कारण कई बार मजदूरों और उनके महिला मजदूर साथियों और बच्चों को ठंड के दिनों में खुली छत के नीचे रहने को भी मजबूर होना पड़ता है।
प्रशासन की तरफ से ऐसे मजदूरों के वैकल्पिक व्यवस्था के तौर अभी तक जिले में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि बीते दिनों अपर मुख्य सचिव महिला राधा रतूड़ी ने जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए मजदूरों के लिए जिले में शेल्टर होम के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
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कोट - शांतिकुंज के सहयोग से एक शेल्टर होम का प्रस्ताव बनाया गया है। जल्द ही उसमें निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा जो विद्यालय किसी कारणवश बंद हो चुके हैं वहां पर भी शेल्टर होम चलाए जाने का प्रयास किया जाएगा। - नितिन सिंह भदौरिया, जिलाधिकारी
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जिले में 13 हजार से अधिक मजदूर पंजीकृत हैं। ज्यादातर मजदूरों के पास रहने का कोई ठौर ठिकाना नहीं है। जिले के विभिन्न स्थानों में सरकारी, अर्द्धसरकारी और प्राइवेट भवनों के निर्माण कार्य में जुटे इन मजदूरों को अक्सर उन्हीं निर्माणाधीन भवनों के पास रात गुजारनी पड़ती है। कहीं भी शेल्टर होम नहीं होने के कारण कई बार मजदूरों और उनके महिला मजदूर साथियों और बच्चों को ठंड के दिनों में खुली छत के नीचे रहने को भी मजबूर होना पड़ता है।
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प्रशासन की तरफ से ऐसे मजदूरों के वैकल्पिक व्यवस्था के तौर अभी तक जिले में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हालांकि बीते दिनों अपर मुख्य सचिव महिला राधा रतूड़ी ने जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए मजदूरों के लिए जिले में शेल्टर होम के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
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कोट - शांतिकुंज के सहयोग से एक शेल्टर होम का प्रस्ताव बनाया गया है। जल्द ही उसमें निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा जो विद्यालय किसी कारणवश बंद हो चुके हैं वहां पर भी शेल्टर होम चलाए जाने का प्रयास किया जाएगा। - नितिन सिंह भदौरिया, जिलाधिकारी