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अज्ञात बीमारी की चपेट में आने से बूड़ाधार में 15 दिन में चार दर्जन बकरियां मरी
Updated Sat, 17 Mar 2018 12:08 AM IST
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। विकासखंड भैंसियाछाना के आपदा प्रभावित बूड़ाधार गांव में पशुपालकों की बकरियों को अज्ञात बीमारी ने घेर लिया है। इसके कारण 15 दिनों में चार दर्जन बकरियों की मौत हो गई है। सूचना पर बृहस्पतिवार शाम डॉक्टरों की टीम ने गांव का दौरा किया और शिविर लगाकर बीमार बकरियों का इलाज किया।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि जंगल से घर आते ही बकरियां लड़खड़ाने लगती हैं और उनका पेट फूलने लगता है। एक-दो दिन में ही बकरी मर जाती है। क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष कुमार ने बताया कि गांव के लगभग एक दर्जन पशुपालकों की करीब 50 से ज्यादा बकरियों की मौत हो चुकी है। बीमारी के कारण कैलाश राम की सात, किशन राम, श्यामलाल, सुनीता, पप्पूलाल की चार-चार, शोभा देवी, पूजा देवी की तीन-तीन बकरियों की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा कई अन्य ग्रामीणों की भी एक या दो बकरियों की भी मौत हो चुकी है। शिकायत के बाद बृहस्पतिवार को डॉक्टरों की टीम ने गांव में शिविर लगाकर 87 बकरियों का इलाज किया और दवा बांटी। शिविर मेें डॉ. रचना, डॉ. करन गुप्ता, रविंद्र सिंह राणा, गीता, जगदीप मेहता, राजेंद्र भाकुनी आदि थे। इधर, क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष कुमार ने शासन से पशुपालकों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
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क्षेत्रवासियों ने बताया कि जंगल से घर आते ही बकरियां लड़खड़ाने लगती हैं और उनका पेट फूलने लगता है। एक-दो दिन में ही बकरी मर जाती है। क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष कुमार ने बताया कि गांव के लगभग एक दर्जन पशुपालकों की करीब 50 से ज्यादा बकरियों की मौत हो चुकी है। बीमारी के कारण कैलाश राम की सात, किशन राम, श्यामलाल, सुनीता, पप्पूलाल की चार-चार, शोभा देवी, पूजा देवी की तीन-तीन बकरियों की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा कई अन्य ग्रामीणों की भी एक या दो बकरियों की भी मौत हो चुकी है। शिकायत के बाद बृहस्पतिवार को डॉक्टरों की टीम ने गांव में शिविर लगाकर 87 बकरियों का इलाज किया और दवा बांटी। शिविर मेें डॉ. रचना, डॉ. करन गुप्ता, रविंद्र सिंह राणा, गीता, जगदीप मेहता, राजेंद्र भाकुनी आदि थे। इधर, क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष कुमार ने शासन से पशुपालकों को मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
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