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हमारा गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान : शर्मा
Updated Sat, 25 Nov 2017 10:35 PM IST
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अल्मोड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से संविधान दिवस पर एसएसजे परिसर के विधि संकाय में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर और गोष्ठी में विभिन्न कानूनों की जानकारी दी गई। जिला न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ। डा. भीमराव अंबेडकर ने दो वर्ष, 11 महीने 18 दिन में संविधान को तैयार कर राष्ट्र को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सर्वोच्च संविधान है। यह विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। जवाहर लाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, सरदार बल्लभ भाई पटेल, मौलाना कलाम आदि संविधान सभा के प्रमुख सदस्य थे। उन्होंने कहा कि न्याय की स्वतंत्रता और रक्षा के लिए भारतीय संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर विशेष बल दिया है। सामाजिक न्याय से अभिप्राय है कि मनुष्य के बीच में जाति और वर्ण के आधार पर भेद न माना जाए। हर नागरिक को उन्नति के समुचित अवसर उपलब्ध हों। स्थायी लोक अदालत नैनीताल के अध्यक्ष ओम कुमार ने कहा कि समानता से अभिप्राय अपने व्यक्तित्व के समुचित विकास के लिए प्रत्येक मनुष्य को समान अवसर उपलब्ध होने चाहिए। धर्म, मूल, वंश, जाति, स्त्री, पुरुष के आधार पर एक व्यक्ति तथा दूसरे के बीच कोई भेद नहीं होना चाहिए।
प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने संविधान के बंधुतत्व, समाजवाद तथा पंथ निरपेक्ष जैसे विषयों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश में कई राज्य हैं और अनेक मतों को मानने वाले लोग हैं। उनमें एकता और बंधुता स्थापित करने के लिए संविधान मेें पंथ निरपेक्ष राज्य का आदर्श रखा गया है। रिसर्च स्कालर विधि संकाय एकता ने बताया कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया गया है। इस मौके पर डा. अरशद हुसैन, विभागाध्यक्ष डा. एसके खंडेवाल, प्रो. एके नवीन, प्रो. जेएस बिष्ट, प्रो. अमित पंत आदि मौजूद थे। इस अवसर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकें वितरित की गई।
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उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सर्वोच्च संविधान है। यह विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। जवाहर लाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, सरदार बल्लभ भाई पटेल, मौलाना कलाम आदि संविधान सभा के प्रमुख सदस्य थे। उन्होंने कहा कि न्याय की स्वतंत्रता और रक्षा के लिए भारतीय संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर विशेष बल दिया है। सामाजिक न्याय से अभिप्राय है कि मनुष्य के बीच में जाति और वर्ण के आधार पर भेद न माना जाए। हर नागरिक को उन्नति के समुचित अवसर उपलब्ध हों। स्थायी लोक अदालत नैनीताल के अध्यक्ष ओम कुमार ने कहा कि समानता से अभिप्राय अपने व्यक्तित्व के समुचित विकास के लिए प्रत्येक मनुष्य को समान अवसर उपलब्ध होने चाहिए। धर्म, मूल, वंश, जाति, स्त्री, पुरुष के आधार पर एक व्यक्ति तथा दूसरे के बीच कोई भेद नहीं होना चाहिए।
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प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने संविधान के बंधुतत्व, समाजवाद तथा पंथ निरपेक्ष जैसे विषयों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश में कई राज्य हैं और अनेक मतों को मानने वाले लोग हैं। उनमें एकता और बंधुता स्थापित करने के लिए संविधान मेें पंथ निरपेक्ष राज्य का आदर्श रखा गया है। रिसर्च स्कालर विधि संकाय एकता ने बताया कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया गया है। इस मौके पर डा. अरशद हुसैन, विभागाध्यक्ष डा. एसके खंडेवाल, प्रो. एके नवीन, प्रो. जेएस बिष्ट, प्रो. अमित पंत आदि मौजूद थे। इस अवसर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकें वितरित की गई।
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