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मुझे तो बस अपने परिवार का पेट पालना है साहब...
Updated Sun, 06 May 2018 11:52 PM IST
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अल्मोड़ा। गरीबी के कारण पढ़ाई कक्षा सात तक ही कर पाया और कम उम्र में ही परिवार की मदद करने के लिए मजदूरी के काम को अपना लिया। मुसीबत ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा। उसी दौरान एक हादसे में अपना दायां हाथ गवां दिया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और पिछले सात साल से अल्मोड़ा में मजदूरी कर अपनों का पेट पाल रहा है बिहार निवासी 24 साल का सुनील साह।
बुधवार को एक होटल में सुनील बाएं हाथ में हथोड़ा पकड़कर मजदूरी का काम करता दिखाई दिया। उसने बताया कि घर में मां-बाप थोड़ी खेती करते हैं, दो बहनों की शादी हो गई, लेकिन घर में अभी एक बहन और दो छोटे भाई के अलावा उसकी पत्नी और एक बच्चा है। परिवार की सारी जिम्मेदारी उसी पर है। सुनील ने बताया कि वह अपना पेट किसी तरह भर लेता है, लेकिन पहली जिम्मेदारी परिवार के भरण पोषण की है। गोरखपुर में बिजली का करंट लगने के बाद उसको हाथ कटवाना पड़ा। उपचार के बाद वह अल्मोड़ा आ गया और यहीं मजदूरी का काम करने लग गया। मजदूरी में कभी ज्यादा कभी कम मिल जाता है और उस पैसे को इकट्ठा कर वह हर माह अपने घर को भेज देता है। हालात से मजबूर सुनील ने बताया कि हाथ नहीं होने का अब मलाल नहीं है। उसे तो बस अपने परिवार का पेट भरना है।
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बुधवार को एक होटल में सुनील बाएं हाथ में हथोड़ा पकड़कर मजदूरी का काम करता दिखाई दिया। उसने बताया कि घर में मां-बाप थोड़ी खेती करते हैं, दो बहनों की शादी हो गई, लेकिन घर में अभी एक बहन और दो छोटे भाई के अलावा उसकी पत्नी और एक बच्चा है। परिवार की सारी जिम्मेदारी उसी पर है। सुनील ने बताया कि वह अपना पेट किसी तरह भर लेता है, लेकिन पहली जिम्मेदारी परिवार के भरण पोषण की है। गोरखपुर में बिजली का करंट लगने के बाद उसको हाथ कटवाना पड़ा। उपचार के बाद वह अल्मोड़ा आ गया और यहीं मजदूरी का काम करने लग गया। मजदूरी में कभी ज्यादा कभी कम मिल जाता है और उस पैसे को इकट्ठा कर वह हर माह अपने घर को भेज देता है। हालात से मजबूर सुनील ने बताया कि हाथ नहीं होने का अब मलाल नहीं है। उसे तो बस अपने परिवार का पेट भरना है।
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