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उस दिन खा लेते तो फिर नहीं खा पाते...
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2013 10:52 AM IST
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16 जून को अगर सोनप्रयाग में खाना मिल गया होता तो शायद कभी खाना नहीं खा पाता। हमेशा के लिए गहरी नींद सो जाता। परिजनों से भी कभी नहीं मिल पाता।
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यह कहते-कहते दिल्ली मायापुरी निवासी आरके शर्मा की आंखें भर जाती हैं।
साथियों के साथ सोन प्रयाग लौट आए
कहते हैं कि केदारनाथ का दर्शन तो हुआ नहीं अब टपकेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना करके लौट रहा हूं। शर्मा केदारनाथ का दर्शन करने के लिए 15 जून की रात 10 बजे सोनप्रयाग पहुंचे थे।
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सोन प्रयाग में खाना नहीं मिलने पर साथियों के साथ सोन प्रयाग से ठीक दो किलोमीटर पहले सीतापुर लौट आए।
यहां ठहरने के लिए लाज और खाना भी मिल गया। खाना खाने के बाद वे लाज में सोने के लिए चले गए, लेकिन पूरी रात बारिश होती रही।
बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज ने सोने नहीं दिया। 16 जून को सुबह से ही बारिश होने से लाज नहीं छोड़ा। केदारनाथ के अपने पंडित जी से फोन पर बात की तो उन्होंने मौसम खराब होने के चलते नहीं आने को कहा।
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पूरा सोनप्रयाग ही बह गया
थोड़ी ही देर बाद एनाउंस किया गया कि रामबाड़ा का पुल टूट गया है। 16 जून का पूरा दिन लाज में गुजारा। 17 को सुबह पता चला कि पूरा सोनप्रयाग ही बह गया।
एक भी होटल, घर, पर्यटक, स्थानीय या और कुछ बचा ही नहीं। सीतापुर में पार्किंग में खड़ी लगभग 50 गाड़ियां तेज बहाव में बह गई। 18 जून को थोड़ा मौसम खुलने के बाद पैदल ही सोन प्रयाग पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर कलेजा कांप गया।
19 तक सीतापुर में ही गुजरा। 20 जून को रास्ता खुलने के बाद देहरादून पहुंचे। इसके बाद हमने सोचा की केदारनाथ के दर्शन तो हुए नहीं चलो देहरादून में टपकेश्वर महादेव के ही दर्शन करते चलूं।
आरके शर्मा के साथ राजीव गुप्ता, सुरेंद्र शर्मा और अन्य महिलाएं थीं, जोकि जान बचने के बाद टपकेश्वर महादेव का दर्शन करने पहुंची थी।